कृषि एवं कृषि विस्तार, भूमि सुधार, चकबंदी, लघु सिंचाई, जल संग्रहण क्षेत्र का विकास, जल व्यवस्था, पशुपालन, डेयरी एवं मुर्गी पालन, मछली पालन, सामाजिक वानिकी, वन उपज, लघु उद्योग, खादी एवं कुटीर उद्योग, ग्रामीण आवास, पेयजल, ईंधन एवं चारा, सड़क, पुलिया, पुल आदि, ग्रामीण विद्युतीकरण एवं सप्लाई, गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोत, गरीबी उन्मूलन के कार्य, प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा, तकनीकी एवं व्यवसायिक शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, पुस्तकालय, सांस्कृतिक कार्यक्रम, मंडियां एवं मेले, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, महिला एवं बाल कल्याण, समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजातियों का कल्याण, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, सार्वजनिक संपत्तियों का रख रखाव।
(संविधान की 11वीं अनुसूची के अनुसार, जिन्हें संविधान के 73वें संशोधन के जरिए लागू किया गया)
क्या हुआ अब तक
पंचायतों को 29 विषयों का अधिकार देने की अभी तक गंभीर कोशिश नहीं की गई। प्रदेश में इन में 14 विभागों की एक्टिविटी मैपिंग तो हुई, लेकिन संबंधित विभागों की नियमावलियोें में बदलाव नहीं किया गया। दरअसल एक्टिविटी मैपिंग के जरिये ही पंचायतों को विभागों पर असल अधिकार मिलना है।
पंचायत चुनाव के बाद इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा। अभी तक किसी भी सरकार ने पंचायतों को उनके संविधान प्रदत्त अधिकार देने की कोई गंभीर कोशिश नहीं की। हाल तो यह हुआ कि खुद पंचायतों को भी कभी इस विषय पर जागरू क नहीं किया जाता।
-जोत सिंह बिष्ट, संस्थापक संयोजक, पंचायत जनाधिकार मंच