याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिनियम के सेक्शन 53(1)आर और सेक्शन 90(1)आर को चुनौती दी गई है। इसके तहत क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के पदों पर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के लिए अधिकतम दो बच्चों की शर्त रखी गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि सरकार ने ग्राम प्रधान के पद का चुनाव लड़ने के लिए भी अधिकतम दो बच्चों की शर्त रखी थी लेकिन हाईकोर्ट ने 19 सितंबर को आदेश पारित कर कहा कि 25 जुलाई 2019 के बाद जिनके दो से अधिक बच्चे होंगे वे ही चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
याचिकाकर्ताओं ने क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के पदों पर भी राहत देने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने कोई राहत नहीं दी। अदालत ने इस मामले में सरकार से भी चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।