निर्वाचन आयोग 20 अक्टूबर तक तीन चरणों में इन तीनों पंचायतों के चुनाव करा लेना चाहता है। इसके बाद, क्षेत्र पंचायत प्रमुख और जिला पंचायतों के अध्यक्षों के चुनाव का नंबर आएगा। जिला पंचायत अध्यक्षों के चुनाव से पहले सरकार को उनका आरक्षण तय करना होगा।
इन स्थितियों के बीच, राज्य निर्वाचन आयोग के प्रस्तावित चुनाव कार्यक्रम पर सरकार कितना सहमत है, यह साफ नहीं हो पा रहा है। इस मामले में सियासी हलकों में अलग- अलग तरह की बातें निकलकर सामने आ रही है। यह कहने वालों की भी कमी नहीं है कि सरकार बहुत जल्द चुनाव नहीं चाहती। ऐसे में ये सवाल अपनी जगह है कि हाईकोर्ट के सख्त रुख और वहां दिए गए आश्वासन से मुुंह फेरना सरकार के लिए कितना मुनासिब होगा।
दूसरी तरफ, सरकार जब तक प्रस्तावित चुनाव कार्यक्रम पर कोई फैसला करे, राज्य निर्वाचन आयोग अल्मोड़ा और ऊधमसिंह नगर जिले के कुछ हिस्सों में वोटर लिस्ट के काम को तेजी से पूरा करवाने में जुटा है। इन जिलों के कुछ इलाकों में ऐन वक्त पर सरकार के निर्णयों की वजह से परिसीमन का गणित बिगड़ा है। इसका असर वोटर लिस्ट तक भी आया है।