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Uttarakhand: 582 मलिन बस्तियों के 11 लाख लोगों में से एक को भी नहीं मिल पाया प्रधानमंत्री आवास

Mon, 06 Feb 2023 06:21 AM IST
अलका त्यागी आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून

सार

Pradhan Mantri Awas Yojana News: उत्तराखंड के 63 नगर निकायों में 582 मलिन बस्तियों में करीब 11,71,585 लोग रहते हैं। इनमें 36 फीसदी बस्तियां निकायों जबकि दस प्रतिशत राज्य और केंद्र सरकार, रेलवे व वन विभाग की भूमि पर हैं।
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प्रधानमंत्री आवास योजना के घर - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उत्तराखंड की 582 मलिन बस्तियों में रहने वाले 11 लाख गरीबों में से किसी एक को भी पक्का घर नसीब नहीं हो पाया। कारण सिर्फ और सिर्फ लचर सरकारी सिस्टम है। दरअसल प्रदेश का कोई भी नगर निकाय इसका प्रस्ताव नहीं बना पाया। नतीजतन, केंद्र सरकार ने इस योजना से मलिन बस्तियों को बाहर कर दिया है।

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उत्तराखंड के 63 नगर निकायों में 582 मलिन बस्तियों में करीब 11,71,585 लोग रहते हैं। इनमें 36 फीसदी बस्तियां निकायों जबकि दस प्रतिशत राज्य और केंद्र सरकार, रेलवे व वन विभाग की भूमि पर हैं। बाकी 44 प्रतिशत बस्तियां निजी भूमि पर अतिक्रमण कर बनी हैं। मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए 2015 में शुरू हुई पीएम आवास योजना में ''इन सिटी'' कार्यक्रम के तहत घर बनाने का प्रावधान किया गया था।

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इसके लिए निकायों को प्रस्ताव बनाकर शहरी विकास निदेशालय के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजना था। केंद्र सरकार प्रति आवास एक लाख रुपये की मदद देती। सभी आवास पीपीपी मोड में बनने थे। गरीबों के बेहद लाभकारी इस योजना के तहत सात साल में एक भी निकाय ने प्रस्ताव ही नहीं भेजा।

दून में 129 मलिन बस्तियां
राज्य बनने से पहले नगर पालिका रहते हुए दून में 75 मलिन बस्तियां थीं। राज्य गठन के बाद देहरादून नगर निगम के दायरे में आ गया। वर्ष 2002 में मलिन बस्तियों की संख्या बढ़कर 102 हो गई और वर्ष 2008-09 में हुए सर्वे में यह आंकड़ा 129 तक जा पहुंचा। पीएम आवास योजना के तहत इनमें से एक भी बस्ती के पुनर्वास के लिए प्रस्ताव नहीं बना।


योजना खत्म होने तक बस्तियां ही नियमित नहीं हुईं
पीएम आवास योजना में यह भी शर्त थी कि जिस बस्ती का नियमितिकरण हो चुका हो, उसके पुनर्वास को ही इस योजना का लाभ ले सकते हैं। 2022 में राज्य सरकार ने 102 मलिन बस्तियों को नियमित किया है। इससे पहले तक कोई बस्ती मान्य ही नहीं थीं। प्रदेश में 152 बस्तियों के नियमितिकरण का प्रस्ताव शहरी विकास को आया था, जिसमें से 102 को नियमित किया गया है।

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66 हजार आवास बनाने का लक्ष्य, सात हजार ही बने
केंद्र सरकार ने प्रदेश में शहरी गरीबों के लिए (मलिन बस्तियों से अलग) 2015 से 2022 तक 66 हजार आवास बनाने का लक्ष्य दिया था। इसके सापेक्ष 63 हजार आवासों का प्रस्ताव ही केंद्र को भेजा जा सका। इनमें से सात साल में सात हजार आशियाने ही बन पाए। तीन हजार आवास बनने के करीब हैं। अब करीब 53 हजार आशियाने सरकार को दिसंबर 2024 तक बनाने हैं जो कि बेहद चुनौतीपूर्ण काम है।

केंद्र ने बढ़ाया है योजना का बजट, अवधि बढ़ाई
केंद्र सरकार ने पीएम आवास योजना की अवधि दिसंबर 2024 तक बढ़ा दी है। साथ ही सरकार ने इस साल आम बजट में पीएम आवास योजना का बजट 66 प्रतिशत बढ़ा दिया है। इससे परियोजनाएं बनाने में आसानी होगी तो लाभार्थियों को ग्रांट आसानी से मिल सकेगी।

मुंबई में धारावी बस्ती का हो रहा पुनर्वास
पीएम आवास योजना के तहत मुंबई की सबसे बड़ी बस्ती धारावी का पुनर्वास हो रहा है। इसके लिए पुनर्वास योजना शुरू की गई है, जिसमें 59,165 परिवारों का पुनर्वास किया जाएगा।

पीएम आवास योजना में मलिन बस्तियों का कोई भी प्रस्ताव 2015-2022 के बीच नहीं आया। अब केंद्र सरकार ने योजना से मलिन बस्तियों को बाहर कर दिया है।
- आनंदबर्द्धन, अपर मुख्य सचिव, शहरी विकास।

पीएम आवास योजना के तहत मलिन बस्तियों के पुनर्वास की योजना पीपीपी मोड में संचालित होनी थी। दूसरा इसके लिए मलिन बस्तियों का मान्य होना जरूरी था। इन दो वजहों से इसमें प्रस्ताव नहीं आ पाए।
-राजीव पांडे, सहायक निदेशक, शहरी विकास।
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