मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार देहरादून की रूरल लिटिगेशन संस्था ने राज्य सरकार के उस अध्यादेश को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी है जिसमें सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों के बकाया किराए को माफ कर दिया था।
इससे पहले मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को नोटिस जारी किए थे लेकिन कुछ नोटिस संबंधित पक्ष को प्राप्त हुए बिना वापस आ गए थे। नोटिस केवल डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को प्राप्त हुआ, जिनके अधिवक्ता मंगलवार को कोर्ट में मौजूद रहे। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और बीसी खंडूरी के नोटिस वापस आ गए।
पूर्व मुख्यमंत्री स्व. नारायण दत्त तिवारी व महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का नाम पूर्व में नोटिस से अलग रखा था, लेकिन मंगलवार को हुई सुनवाई में खंडपीठ ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का नाम पुन: नोटिस में शामिल करते हुए तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को नोटिस देने की जिम्मेदारी सरकार को दी है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए नोटिस सर्व होने के बाद की तिथि नियत की है।