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उत्तराखंड: 'महाघोटाले' में अब तक पांच पीसीएस अफसरों समेत 22 लोग हो चुके गिरफ्तार, ऐसे हुआ था घोटाला

Wed, 12 Sep 2018 04:40 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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nh 74 scam
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उत्तराखंड में करीब 400 करोड़ के महाघोटाले में सरकार पांच पीसीएस अफसरों समेत 22 लोगों पर कार्रवाई कर चुकी है। एनएच 74 मुआवजा घोटाले की जांच में पीसीएस अफसरों समेत 22 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें दो नायब तहसीलदार, राजस्व विभाग के कर्मचारी और किसान व बिचौलिए शामिल हैं। मामले में एक एसडीएम और तहसीलदार जेल में हैं। इसके अलावा अलग-अलग मामलों में करीब 02 करोड़ 12 लाख रुपये की वसूली भी हो चुकी है।

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मंगलवार को प्रदेश सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा के दो अधिकारियों डॉ. पंकज कुमार पांडेय और चंद्रेश कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वे शासन में प्रभारी सचिव और अपर सचिव पद पर तैनात हैं। दोनों अधिकारियों पर बतौर जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर (आर्बिट्रेटर) के रूप में भूमि का मुआवजा नियम विरुद्ध कई गुणा तक अधिक निर्धारित करने का आरोप है। शासन ने विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई करते हुए उन्हें अपर मुख्य सचिव कार्मिक के साथ अटैच कर दिया है।

निलंबन आदेशों के मुताबिक, जांच रिपोर्ट में दोनों अफसरों पर प्रथम दृष्टया आरोपों की पुष्टि हुई है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि एसआईटी की जांच में कुछ तथ्य सामने आने के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि अनुशासनात्मक कार्रवाई के रूप में दोनों अधिकारियों को आरोप पत्र जारी होंगे और एक जांच अधिकारी नियुक्त होगा। निलंबन अवधि तक दोनों अफसरों को अपर मुख्य सचिव (कार्मिक) राधा रतूड़ी के साथ संबद्ध (अटैच) किया गया है।

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इन मामलों में एसआईटी ने की जांच

Suspended ias officers
एसआईटी ने 10 जुलाई को सौंपी थी रिपोर्ट
एनएच 74 मुआवजे घोटाले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट 10 जुलाई को शासन को सौंपी थी। इस रिपोर्ट के आधार पर कार्मिक विभाग ने दोनों आईएएस अफसरों को नोटिस जारी किया था। दोनों अफसरों ने 10 अगस्त को अपने जवाब शासन को सौंप दिए थे। इसके बाद एसआईटी ने शासन से पूछताछ की अनुमति मांगी थी। समस्त प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों अफसरों पर कार्रवाई का इंतजार हो रहा था। सरकार ने इस बीच केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को दोनों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पत्र भेज दिया। सूत्रों की मानें तो सोमवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने निलंबन की कार्रवाई की फाइल पर अनुमोदन कर दिया। मंगलवार को निलंबन आदेश जारी हो गए।

इन मामलों में एसआईटी ने की जांच
एसआईटी ने भूमि अधिग्रहण संबंधी आर्बिटेशन के मामलों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 एवं राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 के प्रावधानों तथा केंद्र व राज्य सरकार की वित्तीय प्रक्रियाओं, शासनादेशों और दिशा-निर्देशों के उल्लंघन मामले में अपनी जांच रिपोर्ट शासन को दी। इसमें कृषि भूमि को अकृषि किए जाने, नियम विरुद्ध मुआवजा निर्धारित करने, करोड़ों का प्रतिकर भुगतान करने के आदेश पारित कर वित्तीय अनियमितता की भी जांच भी शामिल थी। एसआईटी की जांच आख्या के आधार पर शासन ने दोनों आईएएस अफसरों पर अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) रुल्स 1969 के नियम तीन के तहत निलंबन की कार्रवाई की।

22 गिरफ्तारी, 15 करोड़ की वसूली
एनएच 74 मुआवजा घोटाले की जांच में अब तक पांच पीसीएस अफसरों समेत 22 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें दो नायब तहसीलदार, राजस्व विभाग के कर्मचारी और किसान व बिचौलिए शामिल हैं। मामले में एक एसडीएम और तहसीलदार जेल में हैं। इसके अलावा अलग-अलग मामलों में करीब 15 करोड़ रुपये की वसूली भी हो चुकी है।
 
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Trivendra Singh Rawat
ऊधमसिंह नगर जनपद में एनएच 74 के चौड़ीकरण के लिए भूमि का अधिग्रहण हुआ। भूमि का लैंड यूज बदलकर कई गुना मुआवजा वसूला गया। तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर डी. सेंथिल पांडियन की प्राथमिक जांच में यह तथ्य सामने आया था कि वर्ष 2015 में कंप्यूटर खतौनी में जो भूमि अकृषि दर्ज की गई वो 2011 से 2015 के बीच के वर्षों में कृषि भूमि थी।

भूमि की फसल पैदावर भी दर्शायी गई। चुनिंदा किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए कृषि भूमि को अकृषि दर्शाकर कई गुना मुआवजा वसूलने की साजिश की गई। इस साजिश में राजस्व विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अन्यों की भूमिका रही, जिनके नाम एक-एक करके सामने आ रहा है।

पहले दिन से ही भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है। हमने यह कहा है कि भ्रष्टाचार में लिप्त कोई कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री
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