- एवीएसएम, महावीर चक्र, ले.जनरल आनंद स्वरूप
- ब्रिगेडियर महेंद्र प्रताप सिंह गुप्ता
- सेना मेडल, ब्रिगेडियर एनके गुप्ता
- ब्रिगेडियर बलराज कपूर
- सूबेदार मेजर, धन सिंह
-सूबेदार मेजर, मोहन प्रसाद जोशी
-सूबेदार मेजर एसएस बिष्ट
- सूबेदार अवतार सिंह
-नरेंद्र कुमार ओवरॉय
- रंजीत सिंह नेगी, एयर फोर्स
- सीपीओ महेंद्र सिंह, इंडियन नेवी
ये वीर नारियों हुईं सम्मानित
- चित्रा देवी
- भुन्द्रा देवी
- प्रभा देवी
विजय दिवस के उपलक्ष्य में विजय ज्योति के देहरादून पहुंचने पर सेना की गोल्डन की डिवीजन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में 1971 भारत-पाक युद्ध के दौरान अहम मोर्चे पर तैनात ले. जनरल आनंद स्वरूप ने युद्ध के दास्तां व अनुभवों को साझा कर उपस्थित सैन्य अधिकारियों, जेसीओ और जवानों में जोश भर दिया।
ले. जनरल ने कहा कि जब भारत पाक युद्ध शुरू हुआ तो उस समय वह सेना के किलो फोर्स के कमांडर थे। जिसे उसी समय गठित किया गया था और युद्ध समाप्त होने के बाद फोर्स को खत्म कर दिया गया था। उनके साथ उस समय चार बटालियन भेजी गई थी, जिसमें दो भारत की थी और दो बांग्लादेश की। इसमें से भी एक बटालियन ऐसी थी, जिसे युद्ध का अनुभव नहीं था। वह केवल उग्रवाद वाले इलाकों में काम कर रहे थे।
इसलिए उन्हें कम समय में ट्रेन करना किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन सभी ने युद्ध में अच्छा प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के महत्वपूर्ण इलाके पर तीन दिन में ही कब्जा कर लिया था। इसके बाद कुमीरा हाट को भी 48 घंटे के संघर्ष के बाद अपने कब्जे में ले लिया था। युद्ध के दौरान उस समय पाकिस्तान हमसे मजबूत था। उसके पास अच्छे हथियार, गोला बारूद और साजो-सामान था, जबकि हमारे पास ऐसा कुछ नहीं था। बावजूद इसके भी हम इस युद्ध में विजयी रहे और विश्व को बता दिया कि भारत एक शक्तिशाली राष्ट्र की ओर अग्रसर है।