दुर्लभ श्रेणी के वन्य जीव में शामिल हिमालयन थार को चर्म रोग से बचाने के लिए और बुग्यालों में घास चुगने के लिए पहुंचने वाली भेड़-बकरियों का टीकाकरण किया जाएगा। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग ने इसकी कार्ययोजना बनाई है, जिसमें प्रभागीय क्षेत्र में चमोली व रुद्रप्रयाग जिले में 12 हजार से अधिक भेड़-बकरियों का टीकाकरण किया जाना है। बुग्यालों में इन्हीं जानवरों के संपर्क में आने से हिमालय थार चर्म रोग से पीड़ित हैं।
पर्यटक स्थल चोपता के बुग्याल सहित मद्महेश्वर, रुद्रनाथ समेत प्रभागीय क्षेत्र के ऊपरी क्षेत्रों में हिमालयन थार पाया जाता है जो झुंड में विचरण करता है। साथ ही ग्रीष्मकाल में बुग्यालों में पहुंचने वाली भेड़-बकरियों के साथ यह जीव घास चुगता है। ऐसे में यह जीव चर्म रोग (सारकोप्टिक) की चपेट में आ रहा है। यह रोग भेड़-बकरियों में पाए जाने वाले परजीवी घुन के कारण फैलता है।
इस रोग में त्वचा में संक्रमण होने लगता है और धीरे-धीरे बाल निकल जाते हैं, जिसके बाद त्वचा पर चकते-चकते बन जाते हैं। चर्म रोग के कारण दो वर्षों में पांच हिमालयन थार की मौत हो चुकी है। साथ ही यह बीमारी अन्य जंगली जानवरों को भी प्रभावित करती है।
हिमालयन थार को इस बीमारी से निजात दिलाने के लिए केदारनाथ वन्य जीव ने कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत बुग्यालों में घास चुगने के लिए आने वाली भेड़-बकरियों का टीकाकरण किया जाएगा। पहले चरण में चमोली जिले में 5048 बकरियों व 1098 भेड़ का टीकाकरण किया जा चुका है।
दूसरे चरण में रुद्रप्रयाग जिले में ऊखीमठ ब्लॉक के तुंगनाथ घाटी, मद्महेश्वर घाटी, कालीमठ घाटी के गांवों के पशुपालकों की भेड़-बकरियों का टीकाकरण किया जाना है। इसके तहत, प्रभाग के रेंज स्तर पर पशुपालकों से उनके भेड़-बकरियों की संख्या की जानकारी जुटाई जा रही है।
हिमालयन थार तीन-चार वर्षों से चर्म रोग से पीड़ित हैं। यह रोग बुग्यालों में आने वाले भेड़-बकरियों के संपर्क में आने से फैल रहा है। इसकी रोकथाम के लिए अब प्रभागीय स्तर पर रेंजवार भेड़-बकरियों का टीकाकरण किया जा रहा है। पहला चरण पूरा हो चुका है अब दूसरे चरण में रुद्रप्रयाग जिले में भेड़-बकरियों पर टीका लगाया जाना है, जिसके लिए जरूरी सूचनाएं एकत्रित की जा रही हैं।
- अमित कंवर, डीएफओ केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग गोपेश्वर/चमोली