ककराह नाले पर तकरीबन एक किलोमीटर लंबे हिस्से को सफारी के लिए चिह्नित किया गया। इसके दोनों ओर तारबाड़ और दीवारें खड़ी की जाएंगी। सफारी का आनंद लेने के लिए आने वाले पर्यटकों को मगरमच्छों से कोई खतरा न हो और पर्यटकों की दूरी भी बनी रहे, इसके लिए सुरक्षित ट्रैक भी बनाया जाएगा।
तराई पूर्वी वन प्रभाग की सुरई रेंज के ककराह नाले पर मगरमच्छों की संख्या अधिक है, जिसे देखते हुए राज्य और भारत सरकार को सफारी निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा था। भारत सरकार से इसे सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है। राज्य सरकार से मिलना बाकी है। उम्मीद है कि जल्द ही मगरमच्छ सफारी बनकर तैयार हो जाएगी। पिछले महीने डीएफओ के साथ ककराह नाले का निरीक्षण भी किया था।
-आईएफएस अभिमन्यु, प्रभारी रेंजर सितारगंज
डेढ़ से ढाई मीटर से भी अधिक लंबे हैं मगरमच्छ
सुरई रेंज के कंपार्ट नौ के ककराह नाले में मगरमच्छों का कुनबा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां लगभग सौ से लेकर डेढ़ सौ तक की संख्या में मगरमच्छ स्वच्छंद विचरण करते हैं। ये मगरमच्छ डेढ़ से ढाई मीटर से भी अधिक लंबे तथा डेढ़ से दो क्विंटल वजन के बताए जाते हैं।
नाले में दो किमी तक रहते मगरमच्छ
वन क्षेत्राधिकारी सुरई रेंज सुधीर चौधरी बताते हैं कि ककराह नाले के लगभग दो किमी हिस्से में मगरमच्छ क्यों रहते हैं, इसके लिए वाइल्ड लाइफ की टीम इस नाले के पानी और आसपास की मिट्टी के नमूने ले चुकी है। वन सीमा के कंपार्ट नौ में ही मगरमच्छ पाए जाते हैं।