राज्य की महत्वाकांक्षी घसियारी कल्याण योजना और 670 बहुउद्देश्यी सहकारी समितियों का कंप्यूटराइजेशन सितंबर माह तक पूरा कर लिया जाएगा। इसका उद्घाटन सितंबर में ही केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे। उद्घाटन पौड़ी गढ़वाल या अल्मोडा में से किसी एक स्थान पर किया जाएगा। कार्यक्रम में 20 हजार महिलाएं शामिल होंगी।
शनिवार को विधानसभा में सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में दोनों योजनाओं की लॉन्चिंग की तैयारियां के संबंध में निर्देश जारी किए। अपर निबंधक आनंद शुक्ला ने बताया कि घसियारी योजना की लॉन्चिंग के लिए 20-20 किलो के 500 बैग बना दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना जीरो प्रतिशत ब्याज पर किसानों को ऋण देने के लिए कार्यक्रम राज्य के 95 ब्लॉक मुख्यालयों में 15 सितंबर से 30 अक्तूबर तक चलाया जाएगा। सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने सभी जिला सहायक निबंधकों को राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना की ओर से जिलों में चलाए जा रहे कार्यों के बारे जानकारी हासिल की।
इस दौरान निबंधक सहकारिता समितियां आनंद स्वरूप, अपर निबंधक आनंद शुक्ला, उपनिबंधक नीरज बेलवाल, एमपी त्रिपाठी, रामिन्द्री मंद्रवाल, मान सिंह सैनी, महाप्रबंधक देहरादून वंदना श्रीवास्तव, अपर जिला निबंधक देहरादून राजेश चौहान आदि मौजूद थे।
तीन लाख महिलाओं के कंधे का बोझ होगा कम
घसियारी कल्याण योजना से प्रदेश के पर्वतीय ग्रामीण इलाकों की करीब तीन लाख महिलाओं के कंधे का बोझ कम होगा। इस योजना के तहत उन्हें उनके गांव में ही पैक्ड सायलेज (सुरक्षित हरा चारा) और संपूर्ण मिश्रित पशुआहार (टीएमआर) उपलब्ध होगा। सरकार एक ओर जहां मक्के की खेती कराने में सहयोग देगी तो दूसरी ओर उनकी फसलों का क्रय भी करेगी।
राज्य सरकार के मुताबिक, प्रदेश के पर्वतीय गांवों में करीब तीन लाख महिलाएं रोज अपने कंधों पर घास का बोझ ढ़ो रही हैं। वह चारा या घर में इस्तेमाल होने वाली ज्वलनशील लकड़ी के लिए रोजाना आठ से दस घंटे तक का समय देती हैं। इस वजह से उनके कंधों में दर्द, कमर दर्द, गर्दन दर्द, घुटनों की समस्या आम है। उन्हें अगर आसानी से घास मिलेगा तो हर महीने करीब 300 घंटे की बचत होगी। इसके साथ ही गांव में रहकर ही उनकी आमदनी बढ़ेगी। प्रदेश में पर्वतीय क्षेत्रों में चारे की कमी के बीच महिलाओं के कंधे पर चारा लाने की बड़ी जिम्मेदारी है। इससे उन्हें मुक्त करने के लिए ही मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना लाई गई है।
योजना के तहत प्रदेश के दो हजार किसान परिवारों की दो हजार एकड़ भूमि पर मक्का की सामूहिक सहकारी खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। चूंकि मक्के की फसल 90 से 120 दिन में तैैयर हो जाती है, लिहाजा किसान इसके बाद तिलहन, मटर और सब्जियों की खेती कर लाभ कमा सकेंगे। खास बात यह है कि सायलेज और टीएमआर का संतुलित आहार देने से दूध में वसा की मात्रा एक से डेढ़ प्रतिशत बढ़ने के साथ ही दूध उत्पादन भी 15 से 20 प्रतिशत बढ़ सकता है। इससे भी पशुपालकों की आय में इजाफा होगा।
सरकार फसल उगवाएगी और खरीदेगी
इस योजना के तहत सरकार एम्स पैक्स के माध्यम से किसानों को कृषि उपकरण, कृषि ऋण सुविधा, बीज, उर्वरक आदि की व्यवस्था कराए जाने के साथ ही उनकी उपज का आवश्यक रूप से क्रय भी करेगी। योजना के तहत मक्के की संयुक्त सहकारी खेती सायलेज, टीएमआर एवं पशुचारा उत्पादन इकाई की स्थापना और पशुपालकों को उपलबध कराने के लिए उत्पाद वितरण प्रणाली की व्यवस्था सहकारिता विभाग की ओर से कराई जाएगी। इसके लिए 670 बहुद्देशीय सहकारी समितियां, 1000 से अधिक राशन की दुकानें, यूएलडीबी, यूसीडीएफ, पशुपालन विभाग के चारा बैंक और अन्य पूर्व स्थापित सरकारी विपणन केंद्रों का इस्तेमाल किया जा सकेगा।