मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के दिल्ली दौरे से लौटते ही केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने उत्तराखंड को 700 करोड़ रुपये की परियोजना की सौगात दी है। ये सौगात पहाड़ों की रानी मसूरी को ट्रैफिक जाम से मुक्त कराने के लिए टनल निर्माण परियोजना की है, जिसे मंत्रालय से पूर्व में ही सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी। मंत्रालय ने इस परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट नियुक्त कर दिया है। कंसल्टेंट एजेंसी अब टनल निर्माण की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करेगी।
गडकरी ने लिखा ‘मसूरी शहर माल रोड व लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी तक भीड़ भाड़ मुक्त व सुगम सड़क कनेक्टिविटी के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी अवॉर्ड कर दी गई है। मसूरी टनल की लंबाई 2.74 किमी होगी, जिसके लिए 700 करोड़ का बजट है।’
मुख्य अभियंता (राष्ट्रीय राजमार्ग) सीके बिरला के मुताबिक, नेशनल हाईवे 707ए पर टनल निर्माण के लिए मंत्रालय ने पूर्व में ही सैद्धांतिक सहमति दे दी थी। प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी तय करने के लिए मंत्रालय ने एक कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने कंसल्टेंट तय कर दिया है।
एक साल में बनेगी डीपीआर
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, कंसल्टेंस एजेंसी अब मसूरी टनल की डीपीआर तैयार करेगी। जिस पहाड़ी को काटकर टनल बनाई जानी है, उसका भूगर्भीय सर्वेक्षण भी होगा। डीपीआर बनाने के कार्य में कम से कम एक साल का समय लगेगा।
मसूरी को मिलेगी जाम से राहत
मसूरी शहर में टनल निर्माण से आए दिन लगने वाले ट्रैफिक जाम से छुटकारा मिल जाएगा। पर्यटन सीजन के दौरान मसूरी में सबसे बड़ी समस्या ट्रैफिक जाम की ही होती है।
वर्षों से हो रही थी कोशिश
मसूरी टनल बनाने के लिए पिछले कई सालों से प्रदेश में सत्तारूढ़ सरकारों ने प्रयास किए, लेकिन कामयाबी वर्तमान भाजपा सरकार में मिली। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने टनल निर्माण के लिए सैद्धांतिक सहमति दी।