कोटद्वार में अंग्रेजों के जमाने में वर्ष 1885 में रेलवे स्टेशन बना था। आजादी से काफी पहले से कोटद्वार में रेलवे की सेवाएं भी शुरू गईं। कांग्रेस की मनमोहन सरकार में इस रूट पर डबल ट्रेक बिछाने की घोषणाएं कीं, जो धरातल पर नहीं उतर सकी। दो साल से इस ट्रेक पर विद्युतीकरण की कवायद चल रही थी, जो वर्ष 2021 के अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में धरातल पर उतर सकी।
पूर्व की सरकारों ने कोटद्वार को मॉडल रेलवे स्टेशन तो घोषित किया, लेकिन आज तक नजीबाबाद से कोटद्वार के बीच न तो डबल लेन ट्रेक बिछ पाया, न ही रेल सेवाओं में ही इजाफा हो सका।
नजीबाबाद से कोटद्वार के बीच के 24 किमी लंबे ट्रेक का विद्युतीकरण न होने से यहां चलने वाली पैसेंजर ट्रेन के साथ ही गढ़वाल एक्सप्रेस और मसूरी के कोच भी डीजल इंजन से जुड़कर कोटद्वार आते जाते रहे हैं। रेलवे ट्रेक के विद्युतीकरण के बाद रेल यात्रियों और विभिन्न संगठनों की ओर से अब गढ़वाल और मसूरी एक्सप्रेस के साथ ही नजीबाबाद तक लोकल पैसेंजर ट्रेन शुरू करने की मांग जोर पकड़ने लगी है।