देवभूमि तीर्थ पुरोहित हकहकूकधारी महापंचायत ने आरोप लगाया कि केंद्र के दबाव में सरकार चारधाम देवस्थानम बोर्ड पर पुनर्विचार से बच रही है। देवस्थानम बोर्ड पर ठोस निर्णय न लेने से चारधामों के तीर्थ पुरोहितों और हकहकूकधारियों में नाराजगी है।
महापंचायत के प्रवक्ता डॉ. बृजेश सती ने कहा कि हाल ही में चारधामों के तीर्थ पुरोहितों व हकहकूकधारियों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर देवस्थानम बोर्ड पर पुनर्विचार करने की मांग की थी।
इस पर सीएम ने तीर्थ पुरोहितों को दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा था। तीर्थ पुरोहितों की ओर से दस्तावेज भी सीएम कार्यालय को दिए गए हैं। तीर्थ पुरोहितों व हकहकूकधारियों को उम्मीद थी कि देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड बैठक में सरकार फैसला ले सकती है।
बैठक में पुनर्विचार को लेकर कोई ठोस निर्णय न लेने से लगता है सरकार दोहरा मापदंड अपना रही है। उन्होंने कहा कि अब देवस्थानम बोर्ड के विरोध में आंदोलन को उग्र किया जाएगा।
23 जुलाई को उत्तरकाशी जिला मुख्यालय में जन आक्रोश रैली का आयोजन किया जाएगा। जिसमें तीर्थ पुरोहितों हक हकूकधारियों के साथ होटल व्यवसायियों व जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार चारधाम यात्रा के लाइव प्रसारण न करने के संबंध में उच्च न्यायालय में हलफनामा देगी। उन्होंने कहा कि लाइव स्ट्रीमिंग करने के बारे में वेदों में भी नहीं लिखा है।
बता दें कि उच्च न्यायालय ने चारधाम यात्रा पर रोक लगाने और चारों धामों की लाइव स्ट्रीमिंग के बारे में राज्य सरकार का आदेश दिया था। कोर्ट के आदेश के आलोक में मीडियाकर्मियों ने शनिवार को मुख्यमंत्री से चारधाम की लाइव स्ट्रीमिंग के संबंध में प्रश्न पूछा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी सुझावों पर विचार करने के बाद हमने चारधाम यात्रा की लाइव स्ट्रीमिंग नहीं करने का फैसला किया है। क्योंकि यह वेदों में नहीं लिखा गया है। हम इस संबंध में उच्च न्यायालय में एक हलफनामा भी दाखिल करने जा रहे हैं।
शुक्रवार को उत्तराखंड देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड की बैठक में बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के गर्भ गृहों का सीधा प्रसारण न करने का फैसला किया गया था। चारधाम यात्रा बंद होने से बोर्ड चारों धामों के सीधा प्रसारण की तैयारी कर रहा था, लेकिन बोर्ड ने तय किया है कि वह सीधा प्रसारण नहीं करेगा।