गणेशपुर से देहरादून के बीच एक्सप्रेस हाईवे के काम में तेजी के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) एक साथ तीन ठेकेदारों को मोर्चे पर उतारेगी। 19 किमी के हाईवे के काम को तीन हिस्सों में बांटा गया है। हर हिस्से के लिए अलग निविदा (टेंडर) की जा रही है। इस परियोजना पर करीब 2000 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है। एनएचआई ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस एक्सप्रेस हाईवे को 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
उत्तराखंड सरकार की इस एक्सप्रेस हाईवे पर खास दिलचस्पी है। इसी का नतीजा है कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड की सीमा में वन क्षेत्र से जुड़ी अनुमति करा दी। वन्यजीव प्राधिकरण की अनुमति भी अंतिम दौर में है। उत्तरप्रदेश सरकार से भी जल्द वनीय अनुमति मिलने की संभावना है। इसके लिए एनएचएआई के अलावा उत्तराखंड सरकार की ओर से भी प्रयास किए जा रहे हैं।
सहारनपुर के गणेशपुर से देहरादून के बीच 19 किमी एक्सप्रेस हाईवे बनाया जाना है। इसमें 17 किमी हाईवे एलीवेटेड होगा। हाईवे का निर्माण तीन हिस्सों में होगा। पहला हिस्सा गणेशपुर से मोहंड, दूसरा मोहंड से टनल और तीसरा टनल से आशारोड़ी तक के कार्य के अलग अलग टेंडर बुलाए जा रहे हैं।
इस पूरी परियोजना की लागत 2000 करोड़ रुपये आंकी गई है। टेंडर प्रक्रिया के बाद यह कार्य अगले वित्तीय वर्ष में अवार्ड हो जाएगा। पहले इसे 2024 तक बनाया जाना था। लेकिन अब इसे 2023 तक बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
गणेशपुर से देहरादून तक हाईवे की टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके कार्य को तीन हिस्सों में बांटा गया है। तीनों हिस्सों के अलग अलग टेंडर होंगे। एक साथ तीन कार्यदायी एजेंसी कार्य में जुटेंगी तो हाईवे का निर्माण तेजी से हो सकेगा। 2021 में ये कार्य अवार्ड किया जाना है।
- सीके सिन्हा, क्षेत्रीय अधिकारी निदेशक, एनएचएआई, उत्तराखंड