प्रदेश में सौर ऊर्जा से जुड़े कई सौ करोड़ के प्रोजेक्ट अधर में लटके पड़े हैं। इन्हें पूरा करने की अवधि 31 अगस्त को खत्म हो चुकी है। अब नियामक आयोग को तय करना है कि अवधि आगे बढ़ाए या फिर टैरिफ तय करे। हालांकि आयोग ने मामले में उरेड़ा से जवाब मांगने के बाद अब यूपीसीएल से भी जवाब मांगा है।
अब नियामक आयोग के फैसले पर ही इन प्रोजेक्ट का भविष्य तय
दरअसल, प्रदेश में 200 मेगावाट सौर ऊर्जा के प्रोजेक्ट शुरू होने थे। उरेड़ा ने पहले चरण की टेंडर प्रक्रिया में 148 मेगावाट के प्रोजेक्ट आवंटित किए थे। इसके बाद दूसरे चरण में 52 मेगावाट के प्रोजेक्ट आवंटित किए गए। मार्च 2019 से मार्च 2020 तक इन प्रोजेक्ट को पूरा करने का समय दिया गया था।
इसके बाद कोविड आ गया तो यह समय 31 अगस्त 2021 तक बढ़ गया था, लेकिन इतने समय में भी जिन लोगों को प्रोजेक्ट आवंटित हुए हैं, उनमें से अधिकतर लोग भूमि, लोन आदि की परेशानियों से जूझ रहे हैं। तमाम ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जिनकी भूमि लीज पर ली जा चुकी है, लेकिन लोन अभी तक पास नहीं हो पाया। कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जिनके सोलर पैनल लग चुके हैं लेकिन वह ग्रिड से कनेक्ट नहीं हो पाए हैं। चूंकि अवधि 31 अगस्त को खत्म हो चुकी है, इसलिए अब नियामक आयोग के फैसले पर ही इन प्रोजेक्ट का भविष्य तय है।
अगर नियामक आयोग ने प्रोजेक्ट को पूरा करने की अवधि बढ़ाई तो इससे परियोजनाओं के संचालकों को बड़ी राहत मिलेगी। वह लगातार इसकी मांग भी कर रहे हैं। दूसरा विकल्प यह है कि चूंकि प्रोजेक्ट निर्धारित अवधि में पूरे नहीं हुए हैं। इसलिए उन्हें टेंडर के शर्तों के मुताबिक तय मूल्य पर बिजली बेचने का मौका नहीं मिलेगा। इसके बजाए उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग जो टैरिफ तय करेगा, उस पर ही बिजली बेचनी होगी।
सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट पर उरेडा से जवाब मांगा गया था, उनका जवाब आ गया है। अब यूपीसीएल से भी कुछ बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है। उनका जवाब आने के बाद आयोग इस पर कोई निर्णय लेगा। जल्द ही फैसला होगा।
-नीरज सती, सचिव, उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग