पुलिस के मुताबिक, सुमन नगर में किराये के मकान में रहने वाले चारों भाई-बहन चार महीने पहले ही दिल्ली से आए हैं। बच्चों की मां का तीन साल पहले निधन हो गया था। पिता ने सालभर पहले ही दिल्ली में दूसरी शादी कर ली है।
परिवार में तनाव होने पर पिता ने बच्चों को सुमन नगर में किराये के मकान में शिफ्ट कर दिया। पिता और ताऊ बीच-बीच में उनको देखने आते हैं। कोरोना काल में स्कूल बंद होने के कारण अभी तक चारों का कहीं दाखिला नहीं हुआ है। पंकज लांबा के साथी मानव का इनके यहां आनाजाना है।
लांबा की कॉल डिटेल खंगालने में जुटी पुलिस
आरटीआई कार्यकर्ता पंकज लांबा की संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से हुई मौत से पुलिस में हड़कंप मचा है। करोड़ों की छात्रवृत्ति घोटाले से पर्दा उठाने में पंकज लांबा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनकी शिकायत पर ही घोटाले का खुलासा हुआ था। मामले में कई लोग जेल जा चुके हैं।
अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में लांबा की मौत से पुलिस ने हर एंगल से जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, पुलिस इसे हादसा मान रही है। बावजूद इसके पंकज लांबा और उनके दोस्तों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल खंगाली जा रही है। गोली चलाने वाली किशोरी के मोबाइल की कॉल डिटेल भी निकाली जा रही है। पुलिस के मुताबिक, गोली करीब छह फीट की दूरी से चली और गर्दन को छेदकर दीवार में जा घुसी।
30.6 बोर की लाइसेंसी राइफल पंकज लांबा की थी। लांबा ने ही मैगजीन निकालकर राइफल किशोरी के हाथों में दी। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या उन्हें इस बात का अहसास नहीं होगा, एक गोली चैंबर में फंसी हो सकती है। किशोरी ने तीन लोगों में लांबा पर ही क्यों निशाना लगाया।
निशाना भी सीधे गर्दन और सिर पर था। लांबा अचानक दोस्त के साथ वहां पहुंचे थे। पहले से पार्टी प्लान नहीं की गई थी। वहां पहुंचने पर ही लांबा ने पार्टी के लिए चिकन और शराब मंगवाई। पुलिस ने कई ऐसे अनसुलझे सवालों को अपनी जांच का आधार बनाया है।
लांबा की आरटीआई पर सामने आया था घोटाला
पंकज लांबा जनहित के मुद्दों पर आरटीआई लगाते रहते थे। वर्ष 2013 में उन्होंने समाज कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति घोटाला की आशंका पर आरटीआई लगाई थी। साथ ही 2016 में हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की। हाईकोर्ट के आदेश पर 2017 में एसआईटी का गठन हुआ और एक दिसंबर 2018 को सिडकुल थाने में छात्रवृत्ति घोटाले का पहला मुकदमा दर्ज हुआ। इसमें अब तक कई लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।
तत्कालीन अपर सचिव वी षणमुगम की जांच में भी फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई थी। एक सफेदपोश के शामिल होने की आशंका पर फरवरी 2019 में इसमें लांबा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई। 31 अक्टूबर 2019 को नेता की गिरफ्तारी हुई।
उत्तराखंड के इस बहुचर्चित घोटाले के तार कुछ और राज्यों से भी जुड़ चुके हैं। घोटाले में वर्ष 2011-12 से लेकर 2016-17 के बीच करीब 1400 छात्रों के फर्जी दाखिले दर्शाकर करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये हड़पने का मामला सामने आ चुका है।
कई बार जता चुके थे हत्या की आशंका
पंकज लांबा कई बार अपनी हत्या की आशंका जता चुके थे। वर्ष 2012 में आरटीआई कार्यकर्ता जगदीश चौहान की पथरी और वर्ष 2017 में रुड़की में भी एक आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या हुई थी। पंकज लांबा अक्सर इन घटनाओं का जिक्र अपने दोस्तों से करते कहते थे। वह कहते थे कि उन्होंने छात्रवृत्ति घोटाले का पर्दाफाश कराया है, इसलिए उनकी जान को भी खतरा है।