पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने मंगलवार को टिहरी जिले के डोबराचांटी पुल और जिला प्रशासन की ओर से प्रस्तावित टेंट कॉलोनी के लिए चयनित जमीन का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पुनर्वास दुकानों का भी निरीक्षण किया गया और एसडीएम को राजस्व विभाग व टीएचडीसी की जमीन से सभी अतिक्रमण को हटाने के निर्देश दिए।
टिहरी झील में पर्यटन विकास के लिए केंद्र सरकार ने बाह्य सहायतित योजना के तहत 1200 करोड़ की सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके लिए पर्यटन सचिव ने परियोजना के लिए चयनित स्थलों का निरीक्षण किया। पर्यटन सचिव ने ग्राम गोरंग, किवाड़ गांव, कोटी कालोनी, बादी गांव में प्रस्तावित 13 डेस्टीनेशन के तहत सभी कार्यों का निरीक्षण किया।
कोटी कॉलोनी में प्रस्तावित सी प्लेन लैंडिग के लिए वैकल्पिक भूमि का निरीक्षण किया। उन्होंने कोटी कॉलोनी एरिया के बोटिंग प्वाइंट, लाइटिंग साउंड, एमपी थियेटर, मार्केट समेत सभी स्थलों का निरीक्षण किया। पर्यटन सचिव ने पर्यटकों की सुविधा के लिए किवाड़ गांव में स्थित होमस्टे का भी दौरा किया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी टिहरी ईवा आशीष, एसडीएम फिन्चा राम, रजा अब्बास, जिला पर्यटन अधिकारी सुरेश सिंह, जिला साहसिक खेल अधिकारी सोबन सिंह राणा, सहायक पर्यटन अधिकारी विजय सिंह, ग्रामीण निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता युवराज सिंह, पेयजल निगम एक्सईएन नवनीत कटारिया समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।
जहाजरानी और जल मंत्रालय देश के कुछ चुनिंदा मार्गों पर एक सीप्लेन सेवा शुरू करने की तैयारी में है। इसके लिए मंत्रालय संभावित एयरलाइन ऑपरेटरों के माध्यम से एक स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसपीवी) ढांचे के तहत सीप्लेन सेवाओं का संचालन शुरू करेगी। परियोजना का निष्पादन और कार्यान्वयन जहाजरानी और जल मंत्रालय के तहत आने वाले सागरमाला डिवेलपमेंट कंपनी लिमिटेड (SDCL) के जरिए किया जाएगा।
सीप्लेन को चलाने के लिए कई रूटों के बारे में चर्चा की जा रही है। हब और स्पोक मॉडल के तहत प्रस्तावित रूटों में अंडमान और निकोबार और लक्षद्वीप, असम में गुवाहाटी रिवरफ्रंट और उमरानो जलाशय रूट पर चर्चा की जा रही है। इसके अलावा दिल्ली की यमुना रिवरफ्रंट से शुरू होकर अयोध्या, टिहरी, श्रीनगर (उत्तराखंड), चंडीगढ़ और पंजाब और हिमाचल प्रदेश के कई अन्य पर्यटन स्थल के विभिन्न द्वीपों तक के रूट पर सीप्लेन चलाने पर विचार किया जा रहा है।
इसके अलावा मुंबई से शुरू हो कर शिरडी, लोनावाला, गणपतिपुले तक, और सूरत से शुरू लेकर द्वारका, मांडवी और कांडला, खिन्दसी डैम, नागपुर और एराई डैम, महाराष्ट्र में चंद्रपुर तक के रूट पर चर्चा की जा रही है।