राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरपी पांडे के मुताबिक गंगा, भागीरथी और अलकनंदा नदी के जल का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा सके इसके लिए गोमुख से हरिद्वार तक 13 स्थानों पर जल के नमूने लिए जाएंगे। जल के नमूने मानसून के अलावा पूरे साल लिए जाएंगे। प्रयास होगा कि जल के नमूने हर महीने लिए जाएं और उनका अध्ययन किया जाए।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भी ली जाएगी मदद
नदियों के जल के नमूनों का वैज्ञानिक अध्ययन करने में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के विशेषज्ञों का भी सहयोग किया जाएगा।
नमामि गंगे परियोजना के तहत होगा अध्ययन
वैज्ञानिकों के मुताबिक नदियों के जल का अध्ययन करने को लेकर नमामि गंगे परियोजना के तहत बजट मुहैया कराया जाएगा। बता दें कि नदियों के जल के नमूनों को लेने और उनके अध्ययन करने में ना सिर्फ वैज्ञानिकों को गोमुख से लेकर हरिद्वार तक भ्रमण करना होगा वरन इसके लिए भारी-भरकम बजट की भी जरूरत होगी। जिसके लिए नमामि गंगे परियोजना के तहत बजट मुहैया कराए जाएगा।