पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के ड्रीम प्रोजेक्ट सौंग बांध पेयजल परियोजना पर बात आगे बढ़ती दिख रही है। 1580 करोड़ रुपये की इस परियोजना में अब तक वन एवं पर्यावरण से लेकर पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन के पेच दूर होने के बाद सबसे बड़ी अड़चन बजट की आ रही थी। उसका अब समाधान होता दिख रहा है।
शासन ने वाह्य सहायतित इस परियोजना के लिए फ्रांस के एएफडी बैंक से लोन लेने के लिए प्रस्ताव तैयार कर दिया है, जो अब मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा है। प्रदेश में मुख्यमंत्री परिवर्तन के बाद माना जा रहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का यह ड्रीम प्रोजेक्ट खटाई में पड़ सकता है, लेकिन अब प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की दिशा में शासन स्तर पर प्रयास शुरू हो गए हैं। शासन के नियोजन विभाग की ओर से एजेंस फ्रेंसाइज डी डेवलेपमेंट (एएफडी), फ्रांस से लोन लेने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके तहत लोन के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। जो अब केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
महाप्रबंधक सौंग बांध पेयजल परियोजना के निदेशक आरके तिवारी ने बताया कि लोन स्वीकृति होते परियोजना का काम शुरू कर दिया जाएगा। परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है। परियोजना की जद में आ रहे चार गांवों के करीब 275 परिवारों का पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन होना है। इसके लिए पुनर्वास नीति तैयार की जा चुकी है।
इसमें टिहरी जिले के तीन गांव और देहरादून जिले का एक गांव शामिल है। पुर्नवास के तहत प्रशासनिक और वित्तीय निर्णय लेने के लिए शासन स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तररीय समिति (एचपीसी) का गठन किया गया है। इसके अलावा परियोजना की डीपीआर के भाग-दो (जल वितरण प्रणाली एवं जल शोधन यंत्र) का कार्य उत्तराखंड पेयजल निगम की ओर से किया जा रहा है।
वर्ष 2053 तक की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखकर तैयार की गई है परियोजना
सौंग बांध पेयजल परियोजना के बन जाने से देहरादून शहर व उसके उपनगरीय क्षेत्रों की वर्ष 2053 तक की अनुमानित आबादी को 150 एमएलडी ग्रैविटी आधारित पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। इसके अलावा, इससे ऊर्जा उत्पादन में भी मदद मिलेगी और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता से कृषि उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। सौंग बांध की झील करीब 3.5 किमी लंबी होगी और लगभग 76 हेक्टेअर क्षेत्रफल में फैली होगी। जबकि बांध की ऊंचाई करीब 130.5 मीटर होगी।
सौंग बांध पेयजल परियोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। एएफडी, फ्रांस से लोन लेने के लिए शासन स्तर पर प्रपोजल बनाकर भारत सरकार को भेजा रहा है। धन की स्वीकृति मिलते ही परियोजना का धरातल पर दिखने लगेगा।
- मुकेश मोहन, प्रमुख अभियंता, सिंचाई विभाग