एम्स के भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करने वाले भारतीय वन सेवा के अफसर संजीव चतुर्वेदी ने अब देश की प्रतिष्ठित भारतीय प्रशासनिक सेवा में केंद्र सरकार की लेटरल एंट्री (सीधी नियुक्ति) योजना को चुनौती दी है।
केंद्र सरकार ने इस योजना के तहत निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को भारतीय प्रशासनिक सेवा में केंद्र में संयुक्त सचिव पद पर तैनाती दी थी। संजीव ने इस मामले में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण की इलाहाबाद बैंच में याचिका दायर की है। जिसके आधार पर केंद्रीय लोक सेवा आयोग, उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी हुआ है। वहीं, केंद्र सरकार ने इस मामले में जवाब देने के लिए समय मांगा है। अगली सुनवाई तीन सितंबर को होगी।
संजीव की याचिका के मुताबिक सीधी नियुक्ति की यह व्यवस्था दोषपूर्ण, पक्षपात वाली है और कुछ अफसरों की तैनाती मानकों को दरकिनार कर हुई है। केंद्र सरकार ने 2017 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में सीधी नियुक्ति का फैसला किया था। 2019 मेें नौ विशेषज्ञ इस योजना के तहत केंद्र में संयुक्त सचिव बनाए भी गए। केंद्र सरकार का तर्क था भारतीय प्रशासनिक सेवा में संयुक्त सचिव के स्तर पर अफसरों की कमी है।
याचिका के मुताबिक सरकारी दस्तावेज ही यह बता रहे हैं संयुक्त सचिव के खली पदों के सापेक्ष 145 योग्य अफसर सूचीबद्ध हैं और 18 इच्छुक अफसर उपलब्ध भी हैं। संजीव का यह भी कहना है सीधी नियुक्ति के नौ विशेषज्ञों की तैनाती में भी मानकों की अनदेखी की गई।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने ही इनमें से तीन की तैनाती पर सवाल उठाया है। सीधी नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन में तैनाती पाने वाले विशेषज्ञ का रैंक संयुक्त सचिव के रैंक से कम न होने की शर्त थी। तैनाती दो ऐसेे विशेषज्ञों को दी गई जो संयुक्त सचिव रैंक के नहीं थे। तैनाती के समय यह पता ही नहीं था कि तीसरे विशेषज्ञ का रैंक क्या है।
360 डिग्री चयन व्यवस्था पर भी सवाल
संजीव ने 2015 में केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई 360 डिग्री चयन व्यवस्था को भी समाप्त करने की मांग की है। याचिका के मुताबिक 2017 में संयुक्त संसदीय समिति ने भी इस इस व्यवस्था को अपारदर्शी, किसी नियम पर आधारित न होना बताया था। संयुक्त सचिव स्तर पर एन पैनलमेंट के लिए इस व्यवस्था को अपनाया गया।
वन अनुसंधान केंद्र में तैनात हैं चतुर्वेदी
भारतीय वन सेवा 2002 बैच के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी इस समय हल्द्वानी स्थित वन अनुसंधान केंद्र में मुख्य वन संरक्षक के पद पर तैनात हैं। संजीव ने कुछ समय पहले केंद्रीय लोकपाल में सतर्कता अधिकारी के लिए भी आवेदन किया था। उत्तराखंड सरकार की ओर से उन्हें एनओसी भी दे दी गई है।