रुड़की में जिला सहकारी बैंकों की भर्ती प्रक्रिया पर रोक से साफ गया है कि जिस तरह मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, पूर्व मुख्यमंत्री के फैसलों को बदलने में कोताही नहीं बरत रहे हैं, उसी के अनुसार अब पूर्व मुख्यमंत्री के खेमे में शामिल रहे नेताओं पर भी उनकी नजर सीधी नहीं है।
ऐसे में आसार नजर आ रहे हैं कि जल्द ही मामले में जांच कमेटी का गठन हो सकता है। जांच में अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो जिला सहकारी बैंक से जुड़े अधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधियों की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
बता दें कि जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन प्रदीप चौधरी पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खास रहे हैं। मुख्यमंत्री से नजदीकियों के कारण क्षेत्रीय राजनीति में भी उनका हस्तक्षेप था, लेकिन सरकार का निजाम बदलते ही पासे भी पलटने लगे हैं। जिला सहकारी बैंक की भर्ती स्थगित करने का आदेश भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
जानकारों के अनुसार, जल्द मामले में जांच कमेटी का गठन होगा। हालांकि, जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन प्रदीप चौधरी का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में धांधली के आरोपों की किसी भी प्रकार की जांच कराई जा सकती है। भर्ती प्रक्रिया नियमानुसार चल रही थी।