आईजी आधुनिकीकरण अमित सिन्हा ने बताया कि इस फैरो थ्री डी स्कैनर को पिछले साल खरीदा गया था। यह फिलहाल फोरेंसिक लैब में रखा हुआ है। इससे मुख्यालय में सुरक्षात्मक उपायों को लेकर ट्रायल किया गया था। इसे यहां पर बीचों बीच रखा गया। इसने आसपास की लाखों थ्रीडी तस्वीरें खींचीं। इसके डाटा से पता चला कि मुख्यालय के भवन को कहां से खतरा हो सकता है। इसके डाटा से पता चला कि सुरक्षा के लिहाज से स्नाइपरों की तैनाती कहां-कहां पर की जा सकती है।
विदेशों में पुलिस करती है फैरो स्कैनर का इस्तेमाल
उन्होंने बताया कि फैरो स्कैनर का इस्तेमाल विकसित राष्ट्रों की पुलिस काफी पहले से करती आ रही है। यहां भी अब हरिद्वार और देहरादून में जघन्य अपराध के घटनास्थलों की जांच में इसका प्रयोग किया जाएगा। यह पोर्टेबल है और प्रशिक्षित स्टाफ भी पुलिस के पास मौजूद है। इसका इस्तेमाल बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों में इंटीरियर डिजाइनिंग के लिए भी किया जाता है। इससे पता लगाया जाता है कि कहां पर क्या चीज रखी जा सकती है। कितना स्थान बचेगा और आगे इसकी क्या स्थिति रह सकती है।
फैरो स्कैनर को पिछले दिनों खरीदा गया था। इसका इस्तेमाल अब अग्निकांड के कारणों को पता लगाने में किया जाएगा। साथ ही जघन्य अपराधों में घटनास्थल पर इससे जांच की जा सकेगी। इससे बहुत कुछ सटीकता से पता किया जा सकता है। काफी समय से विदेशों में इसका इस्तेमाल हो रहा है।
- अमित सिन्हा, आईजी आधुनिकीकरण व प्रवक्ता उत्तराखंड पुलिस