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उत्तराखंड: क्राइम सीन पर छेड़छाड़ का पता लगाएगा फैरो स्कैनर, लाखों फोटो से तैयार करता है डिजिटल डाटा 

Fri, 27 Aug 2021 01:39 PM IST
अलका त्यागी रुद्रेश कुमार, अमर उजाला, देहरादून

सार

यह स्कैनर लाखों फोटो से एक डिजिटल डाटा तैयार करेगा। इससे अग्निकांड के कारणों और क्राइम सीन पर छेड़छाड़ का सटीकता से पता लगाया जा सकता है।
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क्राइम सीन - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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उत्तराखंड पुलिस अब अग्निकांड के कारणों की जांच और क्राइम सीन रिक्रिएशन (घटनाक्रम दोहराने) के लिए हाईटेक तरीका अपनाने जा रही है। इसके लिए एक थ्रीडी (360 डिग्री) फैरो स्कैनर की मदद ली जाएगी। यह स्कैनर लाखों फोटो से एक डिजिटल डाटा तैयार करेगा। इससे अग्निकांड के कारणों और क्राइम सीन पर छेड़छाड़ का सटीकता से पता लगाया जा सकता है। पुलिस अधकारियों के मुताबिक इससे जघन्य अपराधों में होने वाली जांच को मजबूती मिलेगी। 

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दरअसल, अग्निकांड होता है और बाद में इसके कारणों की जांच शुरू होती है। बहुत ही कम मामलों में पता लग पाता है कि आग शॉर्ट सर्किट से लगी है या किसी और कारण से। ऐसे में यह रिपोर्ट भी सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहती हैं। अब यह काम फैरो स्कैनर की मदद से किया जा सकेगा। फैरो स्कैनर एक मिनट में लाखों थ्रीडी इमेज खींचता है। इसके बाद इन फोटो से एक डिजिटल डाटा तैयार करता है। इस डाटा में पता चल जाता है कि आग की शुरूआत कहां से हुई होगी। मसलन, अगर वहां पर शॉट सर्किट हुआ है तो वह उसके आसपास की इमेज पर फोकस करता है। स्कैनर यह आंकलन भी करता है कि आग की शुरूआत कहां से हुई होगी। 

इसी तरह घटनास्थल पर इसका बखूबी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके उदाहरण के तौर पर यदि कहीं एक्सीडेंट हुआ है तो यह स्कैनर वाहनों और घटनास्थल की थ्रीडी इमेज खींचकर डाटा तैयार करेगा। इससे पता चल सकेगा कि टक्कर का एंगल क्या था। स्पीड लगभग कितनी रही होगी। यही नहीं जघन्य अपराध में इसकी उपयोगिता और भी बढ़ जाती है।
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किसी भी बड़े अपराध के बाद पुलिस सीन रिक्रिएशन के लिए घटनास्थल पर जाती है। यह जाना जाता है कि वहां पर वास्तव में क्या हुआ होगा। अक्सर  ऐसा हत्या, लूट, डकैती आदि के मामलों में पुलिस करती है, लेकिन यह काम अब थ्रीडी स्कैनर की मदद से लिया जाएगा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इसके डाटा से पता किया जा सकता है कि क्राइम सीन पर कोई छेड़छाड़ की गई है या नहीं। यानी कई बार वहां पर कोई वस्तु हटा दी जाती है या रख दी जाती है। थ्री डी इमेेज के इस डाटा से इसका भी सटीकता से पता लगाया जा सकता है। 

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मुख्यालय में हो चुका है सुरक्षा के लिहाज से ट्रायल 

आईजी आधुनिकीकरण अमित सिन्हा ने बताया कि इस फैरो थ्री डी स्कैनर को पिछले साल खरीदा गया था। यह फिलहाल फोरेंसिक लैब में रखा हुआ है। इससे मुख्यालय में सुरक्षात्मक उपायों को लेकर ट्रायल किया गया था। इसे यहां पर बीचों बीच रखा गया। इसने आसपास की लाखों थ्रीडी तस्वीरें खींचीं। इसके डाटा से पता चला कि मुख्यालय के भवन को कहां से खतरा हो सकता है। इसके डाटा से पता चला कि सुरक्षा के लिहाज से स्नाइपरों की तैनाती कहां-कहां पर की जा सकती है। 

विदेशों में पुलिस करती है फैरो स्कैनर का इस्तेमाल 
उन्होंने बताया कि फैरो स्कैनर का इस्तेमाल विकसित राष्ट्रों की पुलिस काफी पहले से करती आ रही है। यहां भी अब हरिद्वार और देहरादून में जघन्य अपराध के घटनास्थलों की जांच में इसका प्रयोग किया जाएगा। यह पोर्टेबल है और प्रशिक्षित स्टाफ भी पुलिस के पास मौजूद है। इसका इस्तेमाल बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों में इंटीरियर डिजाइनिंग के लिए भी किया जाता है। इससे पता लगाया जाता है कि कहां पर क्या चीज रखी जा सकती है। कितना स्थान बचेगा और आगे इसकी क्या स्थिति रह सकती है। 

फैरो स्कैनर को पिछले दिनों खरीदा गया था। इसका इस्तेमाल अब अग्निकांड के कारणों को पता लगाने में किया जाएगा। साथ ही जघन्य अपराधों में घटनास्थल पर इससे जांच की जा सकेगी। इससे बहुत कुछ सटीकता से पता किया जा सकता है। काफी समय से विदेशों में इसका इस्तेमाल हो रहा है।
- अमित सिन्हा, आईजी आधुनिकीकरण व प्रवक्ता उत्तराखंड पुलिस
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