हर साल लाखों लोग सड़क दुर्घटनाओं में मर जाते हैं, इनमें से अधिकतर की मौत की वजह ब्रेन इंजरी होती है। अगर, ऐसे लोग ऑर्गन डोनेशन से रजिस्टर हों या फिर उनके परिवार इसके लिए तैयार हो जाएं तो एक इंसान के ऑर्गन डोनेशन से आठ लोगों को नई जिंदगी मिल सकती है। कानूनन ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन एक्ट 1994 से लागू है। इसके तहत ऑर्गन डोनेशन की सर्जरी आसान हुई और लोगों को नई जिंदगी मिलने लगी है। संभव है बहुत जल्दी हम देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएंगे, जहां ऑर्गन ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध होगी। इसकी शुरुआत हम किडनी ट्रांसप्लांट से करने जा रहे हैं।
- प्रो. रविकांत, निदेशक, एम्स संस्थान, ऋषिकेश
एम्स ऋषिकेश में कॉर्निया ट्रांसप्लांट सेवाएं पहले से ही कार्य कर रही हैं। संस्थान के यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग ने किडनी ट्रांसप्लांट का बीड़ा उठाया है। चूंकि संस्थान में किडनी से ही ऑर्गन ट्रांसप्लांट की शुरुआत होने जा रही है, इसके लिए हमारे पास मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और पूरी तरह से सुसज्जित किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट तैयार है।
- डॉ. अंकुर मित्तल, एमसीएच, यूरोलॉजी एवं एसोसिएट प्रोफेसर डिपार्टमेंट हेड यूरोलॉजी
देश में अंग प्रत्यारोपण की स्थिति
हर साल देश में एक लाख से अधिक कॉर्निया की जरूरत पड़ती है, लेकिन 25 हजार ही मिल पाती है। जबकि किडनी के मामले में हर साल एक से डेढ़ लाख किडनी की जरूरत पड़ती है, लेकिन 3500 से 4000 ही मिलती हैं। इसी तरह से हर साल 15 से 20 हजार लीवर की जरूरत पड़ती है, लेकिन 500 ट्रांसप्लांट ही हो पाते हैं। इसी तरह से हर साल दस हजार के करीब हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, जबकि 10 से 15 ही संभव हो पाते हैं।