उधार के इंजीनियर यानी विभिन्न निगमों से आने वाले इंजीनियर अब उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) में ऊर्जा भरेंगे। यूपीसीएल में प्रतिनियुक्ति से जेई और एई लाने का शासनादेश जारी हो गया है।
अपर सचिव भूपेश चंद्र तिवारी की ओर से जारी शासनादेश के मुताबिक, यूपीसीएल में जूनियर इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर के रिक्त पदों को अब अन्य निगमों के इंजीनियरों से प्रतिनियुक्ति के आधार पर भरा जाएगा। प्रतिनियुक्ति की अवधि दो वर्ष की होगी।
इन पर आने वाले खर्च को यूपीसीएल वहन करेगा। सीधी भर्ती के पदों पर नियुक्ति या दो वर्ष की अवधि में से जो भी पूर्ण हो जाएगा, उसके बाद प्रतिनियुक्ति खुद ही समाप्त समझी जाएगी। एक बार प्रतिनियुक्ति की अवधि समाप्त होने के बाद दोबारा प्रतिनियुक्ति के लिए शासन से अनुमति लेनी होगी। प्रतिनियुक्ति की बाकी शर्तें वित्त विभाग के नियमों के मुताबिक होंगी।
कुल 130 से अधिक पद हैं खाली
यूपीसीएल में इस वक्त सहायक अभियंता(एई) और अवर अभियंता(जेई) के करीब 130 पद रिक्त हैं। इनमें एई के करीब 50 पद ओर जेई के करीब 80 पद हैं। जेई के पदों पर भर्ती को पूर्व में परीक्षा हुई थी जो कि विवादों के बाद निरस्त कर दी गई थी। लंबे समय से यह पद नहीं भरे जा सके हैं। लिहाजा, यूपीसीएल में प्रतिनियुक्ति का फार्मूला अपनाया जा रहा है।
विरोध में उतरी इंजीनियर एसोसिएशन
यूपीसीएल में बाहरी निगमों से इंजीनियर लाने के मामले पर इंजीनियर एसोसिएशनों ने विरोध शुरू कर दिया है। उत्तरांचल पावर इंजीनियर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष वाईएस तोमर का कहना है कि इस तरह का फैसला लेने से पहले किसी को भी भरोसे में नहीं लिया गया है।
उन्होंने कहा कि आमतौर पर बोर्ड में ऐसा मामला पास किया जाता है लेकिन वह भी नहीं हुआ। लिहाजा, उनकी एसोसिएशन इसका पुरजोर विरोध करेगी। वहीं, उत्तराखंड पावर जूनियर इंजीनियर एसोसिएशन के सचिव संदीप शर्मा का कहना है कि वह अभी शासनादेश का अध्ययन करने के बाद आगे की रणनीति तय करेंगे।