ऐतिहासिक है राष्ट्रपति आशियाना
राष्ट्रपति आशियाना की स्थापना मूलतः 1838 में गवर्नर जनरल के अंगरक्षक के घोड़ों और सवारों के ग्रीष्मकालीन शिविर के रूप में की गई थी। घोड़े मई से जुलाई के महीने में दिल्ली की गर्मी से बचने के लिए यहां रहते थे। देश की आजादी के बाद यह प्रथा राष्ट्रपति के अंगरक्षक ने जारी रखी। आशियाना भवन को 1920 में अंगरक्षक के कमांडेंट के बंगले के रूप में बनाया गया था। 1975-76 में राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के लिए शिमला के वैकल्पिक ग्रीष्मकालीन निवास के रूप में इस एस्टेट और भवन को राष्ट्रपति निवास में बदल दिया गया था। 1976 में बंगले का नाम बदलकर राष्ट्रपति आशियाना रखा गया। यह नाम प्रथम महिला बेगम आबिदा अहमद ने सुझाया था। आशियाना ने राष्ट्रपति अहमद, नीलम संजीव रेड्डी , जैल सिंह और केआर नारायणन की मेजबानी की, जो 1998 में वहां रुके थे। इसके बाद आशियाना का उपयोग बंद हो गया। फिर जीर्णोद्धार किया गया और 2016 में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसका उद्घाटन किया था। अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे आमजन के लिए खोलने की पहल की है। 237 एकड़ में फैले इस परिसर में आशियाना बिल्डिंग, एनेक्सी कॉम्प्लेक्स, एक स्विमिंग पूल और ऊपरी और निचले अस्तबल शामिल हैं। एस्टेट में लीची और आम के पेड़ों का एक बाग है।