इसकी तस्दीक पुलिस के पास पहुंच रही अभिभावकों की शिकायत कर रही है। अभिभावकों शिकायत कर रहे हैं कि उनके बच्चे को लॉकडाउन में ऑनलाइन गेम खेलने की लत पड़ गई है।
ऑनलाइन गेम खेलने के लिए उनके कदम अपराध की तरफ बढ़ रहे हैं। बच्चे ऑनलाइन गेम खेलने में लगने वाले शुल्क के लिए एटीएम कार्ड चोरी कर खाते से रकम निकाल रहे हैं।
रुड़की पुलिस के पास छह माह में ऐसी तमाम शिकायतें कई बच्चों के अभिभावकों ने की है। शिकायत करने के बाद अभिभावक बच्चों पर कार्रवाई करने की बात पर अपने कदम पीछे हटा लेते हैं। सिर्फ बच्चे को डराने की फरियाद पुलिस से कर रहे हैं।
केस नंबर एक - सिविल लाइंस निवासी एक बच्चे ने ऑनलाइन गेम खेलने को मोबाइल खरीदने के लिए अपने दादा के खाते से सवा लाख रुपये निकाल लिए। इसके बाद उसने मोबाइल और अन्य सामान खरीदा। दादा पासबुक में एंट्री कराने पहुंचे तो रकम निकालने का पता लगा। बाद में पता चला कि पोते ने ही यह रकम खाते से निकाली है।
केस नंबर दो - गंगनहर कोतवाली क्षेत्र स्थित एक कॉलोनी निवासी एक महिला ने पुलिस से शिकायत करते हुए बताया कि उनका बेटा 14 साल का है और उसे मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेलने की लत पड़ गई है। उससे मोबाइल छीन लिया तो उसने पर्स से दस हजार चोरी कर नया मोबाइल ले लिया। पुलिस ने कार्रवाई की बात कही तो महिला ने सिर्फ डराने की बात कही।
केस नंबर तीन - गंगनहर कोतवाली क्षेत्र स्थित एक महिला पुलिस के पास पहुंची। महिला ने बताया कि उसके नाबालिग बेटे को मोबाइल पर गेम खेलने की लत लग गई है। एक दिन उनके बेटे के मोबाइल पर नजर पड़ी तो होश उड़ गए। वह मोबाइल में अश्लील मूवी देख रहा था। उन्होंने डांटकर मोबाइल छीन लिया तो घर में रखे रुपये चोरी कर नया मोबाइल खरीद ले आया।
पुलिस ने बच्चों से ऑनलाइन गेम खेलने की बारे में पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि कई गेम ऐसे हैं, जिन्हें प्ले स्टोर से डाउनलोड करने से पहले ही शुल्क जमा करना पड़ता है।
कुछ गेम में एक या दो स्टेज फ्री हैं। अगली स्टेज खेलने के लिए पैसा जमा करना पड़ता है। जैसे गन, बंदूक, तोप और कारतूस खरीदने के लिए शुल्क जमा करना पड़ता है।
पुलिस की ओर से ऐसे बच्चों की काउंसिलिंग की जाती है। बच्चे को समझाया जाता है कि ऐसा करना गलत है। अगर वह ऐसा करेंगे तो भविष्य खराब हो जाएगा। काउंसिलिंग से बच्चे समझ जाते हैं। इसके बाद उनकी कोई शिकायत नहीं आती है।
- एसके सिंह, एसपी देहात