मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के निर्देशों पर पूर्व में लागू हुई एकमुश्त समाधान योजना (वन टाइम सैटलमेंट) की दिक्कतें दूर करते हुए शासन ने बुधवार को अधिसूचना जारी कर दी। इसके तहत एक ओर जहां भवन के नक्शे पास कराने में आसानी होगी तो दूसरी ओर पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। शहरी विकास सचिव शैलेश बगोली की ओर से यह अधिसूचना जारी की गई है, जो छह महीने तक प्रभावी रहेगी।
अधिसूचना के मुताबिक, एकल आवासीय एवं व्यावसायिक श्रेणी में अब पर्वतीय क्षेत्रों में 500 वर्गमीटर तक के भूखंड और मैदानी क्षेत्रों में 300 वर्गमीटर तक के भूखंड में 100 प्रतिशत तक निर्माण कंपाउंड किया जा सकेगा। इस श्रेणी में फ्रंट सैटबैक निर्धारित का 40 प्रतिशत तक पट्टीनुमा निर्माण, ग्राउंड कवरेज में बायलॉज के अनुसार अनुमन्य का 30 प्रतिशत तक कंपाउंड कर सकेंगे।
फ्लोर एरिया रेशियो(एफएआर) में अनुमन्य का 20 प्रतिशत तक कंपाउंड हो सकेगा। मैदानी एवं पर्वतीय क्षेत्रों में स्थल पर पार्किंग न होने पर 500 मीटर परिधि क्षेत्र में पार्किंग की व्यवस्था करनी होगी। पर्वतीय क्षेत्रों में एकल आवासीय भवनों के लिए मास्टर प्लान के रास्तों को छोड़कर और बायलॉज के आवश्यक पहुंच मार्ग के 25 प्रतिशत की छूट अनुमन्य होगी।
वहीं, आवासीय व्यावसायिक लैंड यूज में व्यावसायिक दुकान एवं कार्यालय श्रेणी में न्यूनतम पहुंच मार्ग निर्धारित का 15 प्रतिशत तक कम होने पर भी नक्शा पास हो जाएगा। अगर घर में दुकान बनाई है तो दो टुकड़ों में नक्शा पास होगा। एक भवन का नक्शा और दूसरा दुकान का। ग्राउंड फ्लोर पर केवल एक दुकान बनाई जा सकती है।
इसके तहत परचून की दुकान, डॉक्टर, वकील, वास्तुविद, चार्टर्ड अकाउंटेंट, तकनीकी सेवा परामर्शदाता, कार्यालय क्लीनिक आदि के कवर्ड क्षेत्रफल, माइनर ऑपरेशन थियेटर एवं अधिकतम दो बेड, डेयरी, बेकरी तैयार करने की गतिविधि, प्रिंटिंग प्रेस का संचालन किया जा सकता है।
जबकि वाहन मरम्मत की दुकान, सर्विस स्टेशन, वर्कशॉप, स्पेयर पार्ट्स के विक्रय की दुकान, आटा चक्की, मांस-मदिरा की दुकान, भवन निर्माण सामग्री की दुकान या निकटवर्ती मकान पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली कोई भी दुकान नहीं संचालित होगी। इसमें अग्निशमन विभाग एवं स्ट्रक्चरल सेफ्टी के मानकों के हिसाब से एनओसी लेनी जरूरी होगी। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि आम लोगों की परेशानी दूर करने के लिए यह योजना लागू की जा रही है। जल्द ही भवन उपविधि का सरलीकरण भी किया जाएगा।