गोबर खाद से लकड़ी तैयार करने के लिए पहले दो दिन तक गोबर को सुखाया जाता है। नमी कम होने पर इसे बायो फ्यूल मशीन में डालकर रोटेड किया जाता है। इसके बाद हॉपर से लकड़ी तैयार होती है, जिसे फिर एक दिन सुखाया जाता है। इसके बाद यह जलाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाता है।
छह क्विंटल गौ प्रकाष्ठ उत्पादन पर बचेगा एक पेड़
मोहित ने बताया कि गोबर की लकड़ी का उत्पादन करने से पेड़ों के कटान में कमी आएगी। एक पेड़ काटने पर उससे करीब पांच से छह क्विंटल जलौनी लकड़ी मिलती है। अगर गोबर से छह क्विंटल जलौनी लकड़ी तैयार की जाए तो एक पेड़ को बचाया जा सकता है, इससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
गोबर के उपलों से अधिक सुरक्षित है गोबर की लकड़ी
आम तौर पर लोग गोबर के उपले जलाने में इस्तेमाल करते हैं। गोबर में मिथेन गैस की अधिकता होने के कारण इसे जलाने पर धुआं भी ज्यादा निकलता है, जबकि गोबर प्रकाष्ठ को होलो सिलिंडर की तरह तैयार किया जाता है। लकड़ी बीच में खोखली होने पर इसे जलाने पर हवा पास होती है और आसानी से जलने के साथ धुआं भी कम होता है।
डेढ़ क्विंटल दूध का रोजाना कर रहे उत्पादन
गोबर प्रकाष्ठ बनाने के साथ मोहित अपनी डेयरी में रोजाना डेढ़ क्विंटल दूध का भी उत्पादन कर रहे हैं। इसके लिए मोहित ने एक आधुनिक गौशाला तैयार की है जिसमें साहिवाल, रैड सिंधी और एचएफ प्रजाति की 32 गाय हैं और रोजाना इनके दूध के साथ ही गोबर का भी इस्तेमाल हो रहा है।