कब्जा की गई सरकारी जमीन या विवादित जमीनों पर अब बिजली का कनेक्शन नहीं मिलेगा। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने यह नियम बदल दिया है। इसके तहत जब तक जमीन का मालिकाना हक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं होगा, तब तक पावर कारपोरेशन वहां बिजली का कनेक्शन नहीं देगा।
राजधानी देहरादून सहित प्रदेश के तमाम शहरों में अवैध बस्तियां हैं। इन बस्तियों में आवश्यक सेवा मानते हुए पावर कारपोरेशन ने न केवल बिजली की लाइनें बिछाई बल्कि घर-घर कनेक्शन भी दे रखे हैं। बाद में इन बिजली कनेक्शन और बिलों को लेकर लोग मालिकाना हक जताने लगते हैं।
ऐसे भी तमाम मामले सामने आते रहे हैं जबकि जमीन का मालिकाना हक कोर्ट से किसी को मिला है और कनेक्शन कोई और ले लेता है। इससे विवाद बढ़ता है और यूपीसीएल के लिए भी परेशानी पैदा होती है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने विद्युत आपूर्ति संहिता विनियम 2020 के तहत इसमें बदलाव कर दिया है।
इसके तहत जमीन अगर निगम, निकाय, जिला प्रशासन या सरकार की है तो बिना सरकार की अनुमति उस पर बिजली कनेक्शन नहीं मिलेगा। अगर जमीन कब्जाई गई है तो कनेक्शन बिल्कुल नहीं मिलेगा। अगर किसी जमीन पर कोर्ट ने मालिकाना हक किसी और को दिया है तो उस पर भी कनेक्शन केवल उसी के नाम से दिया जा सकेगा।
अब यह प्रमाण जरूरी
बिजली कनेक्शन लेने के लिए संबंधित जमीन की सेल डीड या लीज डीड होनी जरूरी है। खसरा, खतौनी भी पर्याप्त आधार है। या रजिस्टर्ड जनरल पावर ऑफ अटार्नी हो या निगम, निकाय की टैक्स जमा करने की पर्ची हो। या जमीन का अलॉटमेंट लैटर हो। अगर यह सभी प्रमाण भी न हों तो कम से कम उस जमीन के असल मालिक का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट देना अनिवार्य है।