उत्तराखंड कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी को लेकर दावेदार विधायकों के बीच मचा घमासान दूसरे दिन भी नहीं थम पाया। देर रात तक इस मुद्दे पर बैठकों के दौर चले, लेकिन नतीजा नहीं निकल सका। कांग्रेस विधायक दल का नेता कौन होगा, इस पर अब भी संशय बना हुआ है।
सोमवार को दिल्ली में पहले उत्तराखंड सदन और फिर नॉर्थ एवेन्यू में प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव के आवास पर बैठकों का दौर चला। जिसमें संगठन महामंत्री वेणुगोपाल ने भी हिस्सा लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रातव, प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा सहित विधायक दल के तमाम नेताओं ने अपनी बात रखी। पाटी सह प्रभारी राजेश धर्माणी और दीपिका पांडे भी बैठक में मौजूद रहीं। देर शाम तक पार्टी नेता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए। इससे पूर्व पार्टी प्रदेश प्रभारी ने विधायकों से एक साथ और फिर अलग-अलग चर्चा की।
अंत में विधायकों ने एक लाइन का प्रस्ताव पारित करते हुए नेता प्रतिपक्ष का फैसला पार्टी आलाकमान पर छोड़ दिया गया। इधर, सूत्रों का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष के साथ अब पार्टी प्रदेश अध्यक्ष पद पर भी रार फंस गई है। इसलिए इस पद पर फैसला नहीं लिया जा रहा है। माना जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष का पद प्रीतम को दिए जाने और हरीश रावत को पुन: एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दिए जाने की बात पर पेच फंसा हुआ है।
ऐसा भी न हो तो हरीश प्रदेश अध्यक्ष पद पर अपने किसी विश्वासपात्र को चाहते हैं, लेकिन इसके लिए प्रीतम गुट तैयार नहीं है। सूत्रों के अनुसार, प्रीतम ने इसके लिए यहां तक कह दिया है कि यदि उन्हें पार्टी प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जाता है तो वे किसी अन्य पद को स्वीकार नहीं करेंगे। बहरहाल, पदों की ये लड़ाई लंबी खिंचती दिखाई दे रही है। अभी इसमें कितने और दिन लगेंगे, कहा नहीं जा सकता है।