प्रदेश में नदियों में खनन का काम मानसून के दस्तक देने तक होगा। शासन से 19 जून तक खनन की अनुमति मिल गई है। वन निगम राज्य की 13 नदियों में खनन कराता है। यहां पर सामान्य तौर पर नदियों में खनन सत्र 31 मई को पूरा हो जाता है। पिछले वर्ष से मानसून आने तक खनन किए जाने की व्यवस्था लागू हुई है। इसके लिए वन निगम ने मौसम विभाग को पत्र लिखा था। जिसके बाद मौसम विभाग ने 19 जून तक मानसून के पहुंचने की बात कही है।
अब इसके आधार पर वन निगम ने संबंधित तिथि तक खनन करने का फैसला किया है। इससे वन निगम को राजस्व भी मिल सकेगा। प्रदेश में सबसे बड़ा खनन कार्य गौला नदी में होता
है, जहां पर 51 लाख घनमीटर खनिज निकाला जाना है।
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जिसमें 95 प्रतिशत ही निकासी हुई है। इसी तरह कोसी, दाबका, शारदा, नंधौर में भी लक्ष्य के हिसाब से निकासी बाकी है। अब जून में खनन होने से उम्मीद की जा रही है। वन निगम को तय लक्ष्य के अनुसार से खनन की निकासी कर सकेगा। आरएम मुख्यालय एमआर आर्य ने बताया कि प्रदेश में कई नदियों में तय लक्ष्य के हिसाब से खनन कार्य पूरा हो चुका है। कुछ में खनिज निकासी की जा रही है। अब जून माह में खनन करने की अनुमति मिल गई है, जिसके आधार पर खनन कराया जा रहा है।