मास्टर ट्रेनर राजेंद्र सिंह रावत और सीमा परमार द्वारा इन दिनों चयनित 18 गांवों में युवाओं को आपदा के बाद राहत व बचाव के बेसिक गुर सिखाए जा रहे हैं।
प्राकृतिक या अन्य कारणों से हुई घटना में प्रभावित का रेस्क्यू करना, सांप काटने व हृदयघात की स्थिति में पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने तक प्राथमिक उपचार आदि की जानकारी दी जा रही है।
इसके अलावा प्रशिक्षण में युवाओं को खाई से कम से कम समय में सड़क या संपर्क मार्ग तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए किन उपकरणों का प्रयोग करना है, विषम हालातों में कैसे स्ट्रेचर बनाना है, आग, भूस्खलन, भूधंसाव, बाढ़ में प्रभावितों को सुरक्षित निकालने के साथ ही स्वयं को बचाने के गुर मास्टर ट्रेनर द्वारा सिखाए जा रहे हैं।
कुंडा-दानकोट, नागडांडा, चौकी-बर्सिल, घिमतोली, मलाऊं-फलासी, भैंसारी, सेमी, जाल तल्ला, कविल्ठा, कालीमठ, बेडूला, छांतीखाल, गिरिया, दिलमी, उषाड़ा, रौडू, पांजणा और सकणा।
जिले की भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से ग्राम स्तर पर रेस्क्यू दल का होना बहुत जरूरी है। इसी उद्देश्य से यह पहल की गई है। अगले छह माह में जिले के सभी ग्राम पंचायतों में लोकल रेस्क्यू टीम गठित कर उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही उन्हें जरूरी उपकरण भी मुहैया कराए जाएंगे।
- नंदन सिंह रजवार, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, रुद्रप्रयाग