बोर्ड में पांच प्रतिशत प्रशासनिक फंड के नाम लाखों खर्च दिए गए। लेकिन इस फंड का कोई वर्क आउट नहीं है। इसकी पड़ताल करने का फैसला किया गया कि कितना फंड निकाला गया।
अनुमति एक तल की, दफ्तर दो तल में
बैठक में किराये के भवन में चल रहे कार्यालय को लेकर भी सवाल उठे। यह तथ्य उजागर हुआ कि एग्रीमेंट के अनुसार, एक तल पर कार्यालय खोलने की अनुमति दी गई थी। लेकिन कार्यालय दो तलों में चल रहा है। पूरे भवन की बिजली का 50 बिल का भुगतान बोर्ड कर रहा है। एक अन्य कार्यालय भी भवन में है, उसका बिल भी बोर्ड के खाते से दर्ज हो रहा है। बैठक में यह जवाब नहीं मिला कि किसकी अनुमति दूसरे तल में दफ्तर चलाया गया। बोर्ड का दफ्तर सरकारी भवन में शिफ्ट करने का फैसला लिया गया।
श्रमिकों के पंजीकरण में पारदर्शिता नहीं, सत्यापन होगा
बोर्ड में श्रमिकों के अब तक हुए पंजीकरण का सत्यापन करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दो दिन पूर्व समीक्षा बैठक में नाराजगी जाहिर की थी कि पंजीकरण में पारदर्शिता नहीं अपनाई जा रही है। तय हुआ कि पंजीकरण केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होंगे। बैठक में इस बारे में सदस्यों से भी सुझाव मांगे गए हैं। इस पर अगली बोर्ड बैठक में इस पर चर्चा होगी।
अगस्त में 81.26 करोड़, जमा रह गए 35 करोड़
श्रम मंत्री ने अगस्त 2020 में यह जानकारी दी थी कि कर्मकार बोर्ड के खातों में 81.26 करोड़ रुपये जमा है। लेकिन अब जानकारी सामने आई है कि बोर्ड के खाते में 35 करोड़ रुपये ही जमा है। बाकी धनराशि कहां गई है, इसे लेकर नवगठित बोर्ड भी हैरान परेशान है। फिलहाल 15 करोड़ की खरीदारी को लेकर जारी चेकों को पर रोक जारी रहेगी।
बड़ा सवाल: एफडी जमा है पर सर्टिफिकेट कहां है?
नवगठित बोर्ड के सामने एक बड़ा प्रश्न बैंकों में जमा धनराशि को लेकर भी है। सीए का कहना हैकि बैंकों को न तो ओपनिंग बैलेंस का सर्टिफिकेट दिया गया न क्लोजिंग बैलेंस का। डिपोजिट सर्टिफाई नहीं है। बैंकों में एफडी जमा है, लेकिन उसके सर्टिफिकेट कहां, किसी को नहीं मालूम। सितंबर 2020 के हिसाब से बैंकों में 35 करोड़ रुपये जमा हैं।
बोर्ड की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं। वित्त विभाग ने वित्तीय ऑडिट न कराए जाने को लेकर नाराजगी जाहिर की है। इसलिए 2017 से लेकर अब तक का वित्तीय ऑडिट कराने का फैसला किया गया है। इसके अलावा अन्य निर्णय लिए गए हैं। हम चाहते हैं कि बोर्ड के कामकाज की पारदर्शी प्रक्रिया हो और श्रमिक और मजदूर हित में कार्य हों।
- शमशेर सिंह सत्याल, अध्यक्ष, कर्मकार कल्याण बोर्ड