खटीमा गोलीकांड
एक सितंबर 1994 को अलग राज्य उत्तराखंड की मांग को लेकर खटीमा में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर शांतिपूर्ण जुलूस निकालते हुए रामलीला मैदान में एकत्र हुए। वहां जनसभा के दौरान पुलिस की बर्बरता में आंदोलनकारी बलिदान और घायल हुए थे। इसी कांड के विरोध में मसूरी गोलीकांड हुआ था, जिसमें और आंदोलनकारी बलिदान हो गए थे। इन दो घटनाओं ने आग में घी का काम किया और आंदोलन ने एक बड़ा रूप ले लिया था।
हमने राज्य आंदोलन के बलिदानियों की याद में ये दीवार बनाई है। खटीमा गोलीकांड के दो बलिदानियों की तस्वीर न लगने का मामला संज्ञान में नहीं है। इसका परीक्षण कराया जाएगा।
- हेम पंत, सचिव, विधानसभा