अभी तक कारपेट एरिया के हिसाब से हाउस टैक्स की गणना होती थी लेकिन अब नया कानून आने के बाद इसकी कैलकुलेशन का तरीका बदल जाएगा। जिस क्षेत्र में जो भी सर्किल रेट होगा, उसका 0.1 प्रतिशत से एक प्रतिशत तक हाउस टैक्स होगा। मसलन, अगर कहीं सर्किल रेट के हिसाब से किसी प्रॉपर्टी की कीमत एक करोड़ रुपये है तो उसका टैक्स 0.1 प्रतिशत यानी 10 हजार रुपये से लेकर एक प्रतिशत यानी एक लाख रुपये तक होगा।
कोई भी निगम-निकाय इससे अधिक या कम टैक्स की वसूली नहीं कर सकेगा। अब सवाल यह है कि जो लोग पहले से टैक्स दे रहे हैं, उस हिसाब से टैक्स बढ़ेगा या घटेगा? इसमें यह साफ कर दिया गया है कि अगर सर्किल रेट की कैलकुलेशन के बाद किसी का पुराना टैक्स एक प्रतिशत से अधिक यानी एक लाख रुपये से ज्यादा बैठ रहा है तो उसे पुराना टैक्स ही देना होगा। अगर किसी का टैक्स पहले कम था और सर्किल रेट के आधार पर ज्यादा बन रहा है तो उसी हिसाब से नई दरों पर टैक्स जमा कराना होगा। अगले पांच वर्षों में इसमें पांच प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी नहीं की जा सकेगी।
निगमों की प्रॉपर्टी का डाटा हुआ ऑनलाइन, निकायों की कवायद तेज
प्रदेश में हाउस टैक्स का नया पैटर्न लागू होने के चलते प्रॉपर्टी का ऑनलाइन रजिस्टर तैयार किया जा रहा है। शहरी विकास निदेशालय की कोशिशों के बाद सभी आठ निगमों में प्रॉपर्टी का पूरा डाटा ऑनलाइन हो गया है। निकायों में भी काफी बड़ी संख्या में प्रॉपर्टी की जानकारी ऑनलाइन हो रही है।