हिमालयी धरोहरों के प्रचार प्रसार और आधुनिक पीढ़ी को उत्तराखंड के गौरवमय इतिहास से रुबरु करवाने के लिए एचएनबी गढ़वाल (केंद्रीय) विश्वविद्यालय ने हिमालय हेरिटेज वॉक (हिमालयी धरोहर यात्रा) की पहल की है।
विवि के इतिहास एवं पुरातत्व विभाग और पर्यटन विभाग की ओर से शुरू की गई इस यात्रा से धीरे-धीरे लोगों की स्मृति से लुप्त हो रही धरोहर दोबारा से अपना स्थान पा सकेंगी। विवि की योजना है कि धीरे-धीरे इस मुहिम में हिमालय क्षेत्र के अन्य केंद्रीय विवि को भी शामिल किया जाएगा।
उत्तराखंड पौराणिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों को संजोए हुए हैं। लेकिन यहां आने वाले लोग धार्मिक यात्रा, शीतकालीन पर्यटन स्थल व साहसिक खेलों के लिए आते हैं। ऐसे में कई स्थान अछूते हैं, जो काफी महत्वपूर्ण हैं। लोग इन धरोहरों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखते हैं। जबकि एक दौर में इन धरोहरों की अपनी विशेष पहचान थी।
इनको पुन: पहचान दिलाने और नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए गढ़वाल विवि का पर्यटन और इतिहास एवं पुरातत्व विभाग आगे आया है। दोनों विभागों ने संयुक्त रुप से हिमालयन हेरिटेज वॉक की शुरूआत की है। इसमें शिक्षकों, छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों को शामिल किया गया है।
कार्यक्रम की शुरुआत करने वाले पर्यटन विभाग के डा. सर्वेश उनियाल और इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के डा. नागेंद्र रावत ने बताया कि हेरिटेज वॉक का आयोजन न केवल भारत बल्कि विश्व के अनेक देशों में भी किया जाता है। हिमालयी धरोहरों को मुख्य धारा में लाने की दृष्टि से विवि का यह प्रयास महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि इस प्रकार के आयोजन भविष्य में अन्य हिमालयी राज्यों के केंद्रीय विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर भी किए जाएंगे। जिससे विलुप्त होती अमूल्य धरोहरों को प्रकाश में लाया जा सके। साथ ही उनके संरक्षण एवं उन्हें पर्यटन मानचित्र में स्थान दिलाने के लिए नीतियां तैयार की जा सके।
हिमालयन हेरटेज वॉक हमारी संस्कृति और धरोहरों के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह बहुत अच्छा प्रयास है। इससे छात्र-छात्राएं जहां हिमालय के इतिहास से रुबरु होंगे। वहीं धरोहर गुमनामी से बाहर निकलेंगी।
-
प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल, कुलपति, गढ़वाल विवि श्रीनगर