प्रदेश में जल्द ही दरोगाओं पर मुकदमों की विवेचना का बोझ कम हो सकता है। छोटे अपराधों (पैटी क्राइम) में अब हेड कांस्टेबल को विवेचना का अधिकार दिलाने पर विचार किया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय में इस बात को लेकर प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है, जिसे जल्द ही मंजूरी मिल सकती है। इस कदम से विवेचनाओं की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ अदालतों में पैरवी भी मजबूत की जा सकेगी।
दरअसल, आईटी एक्ट और कुछ अन्य अपराधों को छोड़कर बाकी सब में दरोगाओं को ही विवेचना का अधिकार होता है। लगातार बढ़ रहे मुकदमों के बोझ से विवेचनाओं में गुणवत्ता नहीं आ पाती है। इससे महत्वपूर्ण से महत्वपूर्ण मुकदमों की पैरवी ठीक तरह न होने के कारण न्याय में देरी होती है। एक समय में कई-कई मुकदमों की विवेचना करने पर दरोगाओं को मानसिक रूप से परेशान होने की बात भी सामने आती है। पिछले दिनों डीजीपी अशोक कुमार ने सबसे पहले पुलिस कल्याण पर ही अपना जोर दिया था।
स्मार्ट पुलिसिंग को लागू करने के लिए एक प्रस्ताव यह भी था कि प्रदेश में दरोगाओं पर विवेचना का बोझ अनावश्यक न बढ़ाया जाए। पहले छोटे अपराधों की विवेचना हेड कांस्टेबल प्रमोटी स्तर के अधिकारी भी करते थे। यह एक अस्थाई व्यवस्था थी। इसका कारण है कि यहां पर हेड कांस्टेबल प्रमोटी (एएसआई) का पद ही नहीं है। ऐसे में पैटी क्राइम की विवेचना का अधिकार हेड कांस्टेबलों को दिए जाने का प्रस्ताव दिया गया था। बीते दिनों गृह सचिव के साथ हुई बैठक में इस प्रस्ताव को भी रखा गया था। अधिकारियों के मुताबिक इस प्रस्ताव को भी जल्द मंजूरी मिल सकती है।
मैदानी जनपदों में रहता है अधिक दबाव
प्रदेश के चार मैदानी जनपदों में पहाड़ी नौ जनपदों से भी अधिक मुदकमे हर साल दर्ज किए जाते हैं। पहाड़ में तैनात दरोगाओं पर तो विवेचना अधिक नहीं रहती। देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर और नैनीताल में अच्छी खासी संख्यारहती है। यहां पर पैटी क्राइम की संख्या भी पहाड़ों से अधिक रहती है। ऐसे में गंभीर प्रकृति के अपराधों के साथ-साथ इन मुकदमों की विवेचना भी दरोगाओं को ही करनी पड़ती है।
क्या हैं पैटी अपराध
कानून के हिसाब से हर अपराध समाज के लिए खतरा ही होता है। कुछ अपराधों को उनकी प्रकृति के आधार पर छोटा बताया जाता है। इनमें एक्सीडेंट, छोटी चोरियां, आपसी झगड़े, मारपीट, गाली गलौच आदि शामिल हैं। इनमें विवेचना भी काफी हद तक छोटी होती है। मौके पर मौजूद गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर इन्हें अदालतों में स्टैंड किया जा सकता है। गंभीर प्रकृति के अपराधों में मौजूदा समय में इलेक्ट्रॉनिक और वैज्ञानिक साक्ष्य भी जुटाने होते हैं।
हमारा उद्देश्य पुलिस को स्मार्ट बनाना है। इसके लिए कई प्रस्ताव आए थे। उनमें से एक यह भी कि छोटे अपराधों की विवेचना का अधिकार हेड कांस्टेबलों को दिया जाए। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। अभी इसमें वक्त जरूर लग सकता है, लेकिन आने वाले समय में विवेचना की गुणवत्ता पर इसका असर देखने को मिलेगा।
-अशोक कुमार, डीजीपी उत्तराखंड पुलिस
रात 11 से सुबह पांच बजे तक ड्यूटी पर रहेंगे सीओ
रात्रि चेकिंग दुरुस्त है या नहीं इसका जिम्मा अब हर रात एक सीओ को दिया गया है। ये सीओ रात 11 बजे से सुबह पांच बजे तक शहर में घूमकर व्यवस्था चेक करेंगे। रात्रि गश्त और चेकिंग प्वाइंट पर मौजूद कर्मचारियों का ब्योरा भी अधिकारी अपने पास रखेंगे। ताकि, किसी भी समय यह चेक किया जा सके।
एसएसपी डॉ. योगेंद्र सिंह रावत ने इस बाबत आदेश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि रात्रि गश्त और चेकिंग सुरक्षा व्यवस्था में अहम बिंदु होता है। ऐसे में अब जोनल ड्यूटी में इंस्पेक्टरों के साथ-साथ शहर में एक सीओ भी तैनात रहेंगे। इनकी ड्यूटी का समय रात 11 बजे से सुबह पांच बजे तक रहेगा। इस दौरान शहर में बनी पिकेट में मौजूद कर्मचारियों की मुस्तैदी पर नजर रखी जाएगी।
प्रत्येक पिकेट और चेकिंग प्वाइंट पर ड्यूटी पर नियुक्त अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा एक रजिस्टर रखा जाएगा। इसमें रात में चेक होने वाले वाहनों के नंबर और नाम पते आदि नोट किए जाएंगे। ताकि, किसी भी घटना के बाद उसमें कार्रवाई करने में आसानी रहे। उन्होंने कहा कि ड्यूटी में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने रात में हर सूचना पर घटनास्थल पर पहुंचने के समय में कमी लाने की भी बात कही।