प्रदेश सरकार पिछले सत्र में 23 सितंबर को राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2020 विधानसभा में लाई थी। विधेयक को सदन से पास कराकर राजभवन भेज दिया गया था। प्रदेश में संचालित सभी राज्य पोषित विश्वविद्यालयों को एक कानून के दायरे में लाने की मंशा से सरकार यह विधेयक लाई थी।
राजभवन से विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटाने की मुझे जानकारी नहीं है। यदि विधेयक लौटा है तो उसका परीक्षण कर उसे पुन: भेजा जाएगा।
- मदन कौशिक, संसदीय कार्य एवं विधायी मंत्री
विधेयक के वापस होने की मेरे पास कोई जानकारी नहीं है। उच्च शिक्षा विभाग को अभी विधेयक प्राप्त नहीं हुआ है। यदि राज्यपाल ने विधेयक को लेकर कुछ सुझाव दिए हैं, तो उन पर विचार होगा और परीक्षण के बाद उन्हें विधिवत ढंग से भेजा जाएगा।
- डॉ. धनसिंह रावत, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री (स्वंत्र प्रभार)
सरकार को घेरने का विपक्ष को मिला मौका
उत्तराखंड राज्य विवि विधेयक 2020 के राजभवन से आपत्तियों के साथ पुनर्विचार के लिए लौटाए जाने से सरकार असहज है। उधर, ऐन विधानसभा सत्र से पहले विपक्ष को मुद्दा मिल गया है। अब विपक्ष इस मसले पर सरकार को घेर सकता है।
ये हैं राजभवन की सात आपत्तियां
1. विधेयक स्वायतत्ता की अवधारणा के विपरीत हो रहा प्रतीत
2. संबद्धता को लेकर उठाया प्रश्न
3. बिल एकरूपता की अवधारणा के विपरीत
4. राज्य की विधायिका केंद्र की विधायिका से ऊपर नहीं
5. कुलाधिपति को राज्य सरकार के अधीन कर दिया
6. विवि के उद्देश्यों व नई शिक्षा नीति के विपरीत
7. नई शिक्षा नीति में नए निकाय का प्रावधान