गंगोत्री विधायक गोपाल सिंह रावत शुक्रवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके अंतिम संस्कार में शुक्रवार सुबह से बारिश के बीच ही उनके पुरानी कचहरी रोड स्थित आवास पर जन सैलाब उमड़ पड़ा। यहां से शव यात्रा पैतृक केदार घाट के लिए निकली तो लोगों ने उनके पार्थिव शरीर पर फूलों की वर्षा कर नम आंखों से विदाई दी।
कैंसर से पीड़ित गंगोत्री विधायक गोपाल रावत का बृहस्पतिवार को देहरादून में उपचार के दौरान निधन हो गया था। बृहस्पतिवार देर रात को ही उनके परिजन अंतिम संस्कार के लिए उनका पार्थिव शरीर उत्तरकाशी लेकर आए। विधायक रावत के आकस्मिक निधन से शोकाकुल पार्टी पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं के साथ जन समूह शुक्रवार सुबह से ही उनके आवास पर जुटना शुरू हो गए।
दोपहर साढ़े बारह बजे उनकी अंतिम यात्रा पैतृक केदार घाट के लिए रवाना हुई। केदार घाट पर भागीरथी किनारे उनके अंतिम दर्शनों के लिए भी लोगों की भारी भीड़ जुटी। डीएम मयूर दीक्षित व एसपी मणिकांत मिश्रा ने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र भेंटकर श्रद्धांजलि दी। बाद में विधायक रावत के जेष्ठ पुत्र आदित्य ने उन्हें मुखाग्नि दी।
इस दौरान डीएम व एसपी के साथ ही दिवंगत विधायक के मित्र व पूर्व विधायक गंगोत्री विजयपाल सिंह सजवाण, यमुनोत्री विधायक केदार सिंह रावत, टिहरी गढ़वाल जिले की प्रतापनगर सीट से विधायक विजय सिंह पंवार, आप नेता कर्नल अजय कोठियाल (सेनि.), नगर पालिका अध्यक्ष रमेश सेमवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष रमेश चौहान, महामंत्री हरीश डंगवाल, पवन नौटियाल, सुरेश चौहान, चंदन पंवार, विजय संतरी, बिजेंद्र नौटियाल, शैलेंद्र मटूड़ा, संवेदना समूह के जयप्रकाश राणा, आमोद पंवार शामिल रहे।
तेरा-मेरा क्या है, कुछ साथ नहीं जाएगा सब यहीं रह जाएगा...
गंगोत्री विधायक गोपाल रावत के निधन के बाद रामलीला मैदान में दिया उनके भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी के साथ वायरल हो रहा है। जिसमें उन्होंने वर्तमान राजनीतिक हालातों पर बेबाकी से बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि तेरा-मेरा क्या है, कुछ साथ नहीं जाएगा। सब यहीं रह जाएगा।
एक दिसंबर 2018 को रामलीला मैदान में नगर पालिका बाड़ाहाट के अध्यक्ष व सभासदों का शपथ ग्रहण समारोह हुआ। उस दौरान गंगोत्री विधायक रावत ने जन समूह को संबोधित किया। उन्होंने कहा था कि भाईबंदी और अपना-पराया देखने से विकास नहीं होता है।
विकास के लिए कठोर निर्णय लेना जरूरी है। कहा था कि राजनीतिक विचारधारा भले अलग हो, लेकिन सबका उद्देश्य क्षेत्र व जिले के विकास का होना चाहिए। कहा था कि सब यही धरा रह जाएगा। तेरा-मेरा क्या है। कुछ साथ नहीं जाएगा... सब यहीं रह जाएगा।