उद्यान विभाग ने रानीखेत की वादियों भी केसर का ट्रायल शुरू कर दिया है। फिलहाल क्षेत्र में तीन काश्तकारों ने बतौर ट्रायल केसर की खेती को अपनाया है। केसर की पौध में फूल निकलने से काश्तकार और उद्यान विभाग दोनों उत्साहित हैं।
1992-93 और 2004 में यहां उद्यान गार्डन में केसर पर रिसर्च भी किया गया था। अमूमन केसर का उत्पादक साढ़े पांच हजार फीट की ऊंचाई पर होता है। केसर की खेती के लिए पहाड़ के काश्तकारों को जागरूक करने के उद्देश्य से उद्यान विभाग ने अब इसके ट्रायल शुरू कर दिए हैं। खनियां में काश्तकार नारायण सिंह ने एक नाली भूमि पर केसर बोया है।
बताया जा रहा है कि 29 अक्तूबर को केसर में फूल आ गए थे। कालिका में ज्योति साह मिश्रा ने आधा नाली में तथा चौबटिया के भड़गांव में मोहन चंद्र बेलवाल ने भी आधा नाली पर केसर की खेती कर रहे हैं।
उद्यान निदेशालय में 2014 में तत्कालीन निदेशक डा. आईए खान के निर्देशन में भी केसर की खेती पर कार्य हुआ था। उद्यान विभाग के अधिकारियों ने बताया केसर की खेती के लिए अगला एक साल महत्वपूर्ण है। अधिकारियों के अनुसार डेढ़ लाख फूलों पर एक किलो केसर प्राप्त होता है। संवाद
मुख्य विकास अधिकारी मनुज गोयल और मुख्य उद्यान अधिकारी टीएन पांडे ने केसर की खेती को लेकर अत्यधिक प्रयास किए हैं। फिलहाल ट्रायल में पुष्प आ रहे हैं। वैज्ञानिकों ने कहा है कि 10 10 दिनों के अंतराल में इसे पानी की जरूरत होती है। अब चार साल बाद देखेंगे कि उत्पादन लगातार हो रहा है या नहीं। इसके बाद स्थानीय काश्तकारों को इसकी खेती के लिए जागरूक किया जाएगा।
-भूपाल सिंह बिष्ट, सीनियर हार्टिकल्चर इंस्पेक्टर, चिलियानौला रानीखेत