पिछले चार दिनों में उत्तराखंड भाजपा की सियासत के सीन लगातार बदलते रहे। पहले सीन में प्रचंड बहुमत के आत्मविश्वास से लबरेज सरकार लोकलुभावन घोषणाओं में मशगूल रही है तो दूसरे सीन में अचानक सुगबुगाहट का दौर शुरू गया और तीसरे सीन में घबराहट और दौड़धूप के हालात पैदा हो गए और चौथे सीन में उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हुई।
तीन दिनों में भाजपा की सियासत जिस तरह से रूप बदलती रही, उसने कई तरह के सवाल और सस्पेंस पैदा किए। लोगों की जुबां पर नेतृत्व के सियासी भविष्य को लेकर सवाल तैरने लगे। लेकिन अब नेतृत्व परिवर्तन के बाद सरकार के भीतर सुलगते असंतोष से उठे उबाल के नीचे बैठ जाने के दावे किए जा रहे हैं।
सीन-1 घोषणा: ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत लोकलुभावन घोषणाओं के बाद बजट पास कराने की तैयारी में जुटे थे। लेकिन अचानक देहरादून पहुंचे केंद्रीय पर्यवेक्षकों रमन सिंह और दुष्यंत गौतम के आने से सारा परिदृश्य बदल गया।
सीन-2 सुगबुगाहट: केंद्रीय पर्यवेक्षक की भूमिका में देहरादून पहुंचे छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और प्रदेश भाजपा के प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने शनिवार को अचानक कोर ग्रुप की बैठक बुला ली। इसी दिन त्रिवेंद्र सरकार को बजट पास कराने की तैयारी में थी। केंद्रीय नेतृत्व फरमान मिलते ही पार्टी के विधायकों और मंत्रियों को हेलिकॉप्टर से देहरादून भेजा गया। सरकार की इस कवायद के बाद सुगबुगाहट शुरू हो गई और इसके सियासी निहितार्थ टटोले जाने लगे।
सीन-3 सस्पेंस और घबराहट: कोर ग्रुप की बैठक के बाद सस्पेंस गहरा गया। हालांकि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बंशीधर भगत ने चेहरा बदलने की संभावना से साफ इंकार किया। सोमवार को अचानक मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दिल्ली का रुख किया। उनके अनायास दिल्ली जाने के बाद सीएम खेमे में धुकधुकी शुरू हो गई।
सीन-4 उत्तराधिकारी की तलाशः दिल्ली से सीएम देहरादून लौटे। उऩके चेहरे पर उदासी ने कुर्सी खिसक जाने की कहानी बयान कर दी। राजभवन में इस्तीफा सौंपने से पहले नए उत्तराधिकारी को लेकर कसरत शुरू हुई।