उत्तराखंड में चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर पहली बार वायुसेना के चार हेलीकॉप्टर एक साथ उतरे। सहारनपुर स्थित सरसावा एयरबेस से पहुंचे हेलीकॉप्टरों ने करीब आधे घंटे तक लैंडिंग और टेक ऑफ का अभ्यास किया। सेना से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अक्तूबर में वायु सेना यहां अभ्यास कर सकती है। इस दौरान वायुसेना के अधिकारी व तकनीकी स्टाफ यहीं ठहरेंगे।
भारत-चीन सीमा से लगे उत्तरकाशी जनपद में चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डा सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि वायुसेना यहां समय-समय पर अभ्यास करती रहती है। मंगलवार दोपहर करीब डेढ़ बजे सहारनपुर स्थित सरसावा एयरबेस से वायुसेना के दो अपाचे और दो एमआई 17 हेलीकॉप्टर चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर पहुंचे। इस दौरान चारों हेलीकॉप्टरों ने एक साथ सफलतापूर्वक लैंडिंग की। बाद में करीब आधे घंटे तक इन हेलीकॉप्टरों का लैंडिंग और टेक ऑफ का अभ्यास चला। इसके बाद चारों हेलीकॉप्टर हवाई अड्डे का हवाई निरीक्षण कर सरसावा एयरबेस लौट गए।
अचानक बढ़ा नदी का जलस्तर: पिकनिक मनाने गए पांच युवक देर रात टापू में फंसे, SDRF ने ऐसे किया रेस्क्यू
हवाई अड्डे पर निर्माण कार्यों की देखरेख कर रहे इंजीनियर घनश्याम सिंह ने बताया कि पहली बार वायुसेना के चार हेलीकॉप्टर एक साथ उतरे। आधे घंटे बाद हेलीकॉप्टर लौट गए। इधर, वायु सेना से जुड़े सूत्रों के मुताबिक 3-4 अक्तूबर से 17-18 अक्तूबर तक वायुसेना चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर अभ्यास कर सकती है जिसके लिए वायुसेना के अधिकारियों व टेक्निकल स्टाफ के भी यहां पहुंचने की खबर है।
सरकार ने भेजा हवाई अड्डे के विस्तार का प्रस्ताव
हाल में सरकार के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग चिन्यालीसौड़ ने हवाई अड्डे के 150 मीटर विस्तारीकरण का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है। विभाग के अनुसार इस विस्तारीकरण पर 19.5 करोड़ खर्च होंगे। हवाई अड्डे का विस्तारीकरण होता है तो उसके बाद यहां वायुसेना के लड़ाकू विमान भी उड़ान भर सकेंगे।
जंगल की आग के कारण नहीं हो पाया था अभ्यास
इसी साल अप्रैल में वायुसेना ने चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे में दो दिन के रात्रि अभ्यास की योजना तैयार की थी जो कि शाम सात से रात दस बजे तक चलना था। लेकिन जंगलों में फैली आग की धुंध के कारण एक ही दिन अभ्यास हो पाया।