कोरोना की तरह ही तेजी से बढ़ रहे जंगल की आग के मामलों को देखते हुए शुक्रवार को वन महकमे का मिजाज भी सख्त हो गया। वन मंत्री हरक सिंह ने खुलकर नाराजगी जताई। हरक की नाराजगी का सबब रहा कि गढ़वाल वन प्रभाग के उप वन संरक्षक केएस रावत को वन मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया।
प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी की ओर से जारी आदेश के मुताबिक केएस रावत की जिम्मेदारी प्रभागीय वन अधिकारी सोहनलाल को सौंपी गई है। बृहस्पतिवार को लैंसडौन क्षेत्र में वन मंत्री हरक सिंह को जंगल में आग लगी दिखी थी।
हरक सिंह खुद ही इस आग को बुझाने में जुट गए थे। बाद में पड़ताल करने पर सामने आया कि उपवन संरक्षक केएस रावत क्षेत्र में मौजूद ही नहीं थे। बताया गया कि केएस रावत का स्वास्थ्य अधिकतर खराब रहता है और इस कारण वे प्रभाग में मौजूद नहीं थे।
वन महकमे में वाहनों की भी कमी
प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी ने बताया कि अल्मोड़ा में तीन रेंजों का निरीक्षण करने पर पाया गया कि यहां वाहन ही उपलब्ध नहीं है। फायर सीजन में प्रत्येक रेंज में पर्याप्त वाहनों का बंदोबस्त करने को कहा गया था। प्रमुख वन संरक्षक ने सभी प्रभागीय वनाधिकारियों को कहा है कि वे रेंजों में वाहन उपलब्ध कराएं।
समीक्षा में आग के कारणों का पता लगाएं
साप्ताहिक समीक्षा में आग के कारणों का पता लगाने का भी निर्देेश दिया गया। प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी ने बताया कि प्रदेश में जंगलों में आग लगने की अधिकतर घटनाएं लापवाही या जानबूझकर आंजाम देने के कारण हो रही हैं। अब तक इस तरह के मामलों में 18 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। अन्य वन प्रभागों के अधिकारियों से भी कहा गया है कि वे अपने यहां भी सख्ती बरतें।
शुक्रवार को करीब 200 हेक्टेयर जंगल जला
शुक्रवार को 12 घंटे की अवधि में ही प्रदेश में करीब 200 हेक्टेयर जंगल जल गया। फायर बुलेटिन के मुताबिक जंगल की आग के कुल 95 मामले सामने आए और करीब चार लाख का नुकसान हुआ।