चयन प्रक्रिया के बाद तैनाती आदेश के बावजूद भी डॉक्टर पहाड़ों के दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देने को तैयार नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैनाती स्थल पर नियुक्ति पत्र जारी करने के बाद चयनित डॉक्टर नौकरी को ठुकरा रहे हैं।
403 चयनित डॉक्टरों में से 132 ने तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। स्वास्थ्य महानिदेशक ने ऐसे डॉक्टरों को पदभार ग्रहण करने के लिए 10 दिन का अंतिम समय दिया है। इसके बाद नियुक्ति को समाप्त किया जाएगा।
कोविड महामारी से निपटने के लिए डॉक्टरों की कमी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 763 डॉक्टरों की भर्ती का प्रस्ताव उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को भेजा था। बोर्ड ने मार्च 2021 में चयन प्रक्रिया पूरी कर 403 चयनित डॉक्टरों की सूची विभाग को दी थी। जिस पर विभाग ने चयनित डॉक्टरों को प्रदेश भर में अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में तैनाती थी। जिसमें अब तक 271 डॉक्टरों ने पदभार ग्रहण किया है। जबकि 132 डॉक्टरों ने तैनाती आदेेश के बावजूद भी पदभार ग्रहण नहीं किया है। इसमें अधिकतर वे डॉक्टर हैं। जिन्हें दुर्गम क्षेत्र में तैनाती मिले हैं।
स्वास्थ्य महानिदेशक ने पदभार ग्रहण न करने वाले डॉक्टरों को नोटिस जारी कर 10 दिन का समय दिया है। इसके बाद भी पदभार ग्रहण न करने पर विभाग की ओर से नियुक्ति को समाप्त की जाएगी।
चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड की ओर से चयनित 403 डॉक्टरों के मार्च महीने में तैनाती आदेश जारी किए थे। 132 डॉक्टरों ने अभी पदभार ग्रहण नहीं किया है। ऐेसे डॉक्टरों को नोटिस जारी कर 10 दिन का समय दिया गया है। इसके बाद विभाग की ओर से नियुक्ति को समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. तृप्ति बहुगुणा, स्वास्थ्य महानिदेशक
प्रदेेश में 600 से अधिक पद खाली
स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों के 2735 पद सृजित हैं। जिसमें वर्तमान में 2145 डॉक्टर प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं। कोविड महामारी के समय डॉक्टरों की कमी का सामना करना पड़ा। बड़ी मुश्किल से विभाग को 403 डॉक्टर मिले थे। उसमें भी डॉक्टर तैनाती स्थल पर जाने को तैयार नहीं है।
पहाड़ों में डॉक्टरों की कमी
सरकार ने इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (आईपीएचएस) के मानकों के अनुसार अस्पतालों की श्रेणी तय की है। जिसमें 526 पीएचसी टाइप ए, 52 पीएचसी टाइप बी, 80 सीएचसी, 21 उप जिला चिकित्सालय, 13 जिला चिकित्सालय शामिल है। इसके अलावा 1897 उप केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही है लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों के अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की सबसे ज्यादा कमी है।