नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने तो सरकार से नया जनादेश हासिल करने तक को कह दिया। नेता प्रतिपक्ष का यह रुख विधानसभा सत्र में विपक्ष के तेवर तल्ख रहने का संकेत भी दे रहा है। कोरोना के कारण अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि प्रदेश में विधानसभा सत्र का संचालन किस तरह से होगा।
इस काम में उलझे सत्ता पक्ष को फ्लोर मैनेजमेंट से भी अलग से जूझना पड़ेगा। सत्र 23 सितंबर से है और इससे पहले ही नेता प्रतिपक्ष ने नए जनादेश की मांग कर विपक्ष के रुख का संकेत भी दे दिया है।
कांग्रेस वैसे कोराना पर नियंत्रण, आपदा प्रबंधन, महेश नेगी प्रकरण आदि मामलों को लेकर सरकार पर सवाल उठाती रही है। प्रीतम सिंह अब जीएसटी को लेकर भी केंद्र और भाजपा की सरकार पर हमलावर हैं। हरीश रावत बेरोजगारी के मुद्दे पर मुखर हैं। जाहिर है कि सत्र के दौरान कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव लाने से लेकर अन्य तरीके से सियासत गरमा सकती है।
चुनाव नजदीक आते ही उठता रहा है विधायकों के अंसतोष का मामला
प्रदेश में हरीश रावत की कांग्रेस सरकार को भी विधायकों के असंतोष का सामना करना पड़ा था। उस समय भाजपा ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी। फर्क इतना है कि उस समय रावत से कांग्रेस की तत्कालीन सरकार के मंत्री तक खासे नाराज थे।