नशा तस्करों का गैंग लीडर सत्तार पर 38 मुकदमे दर्ज हैं।, वह ज्वालापुर थाने का हिस्ट्रीशीटर है। दो बार उस पर गैंगस्टर भी लग चुका है। इस धंधे में उनका बेटा शाहरुख भी शामिल था। जिसे 2019 में रुड़की थाना से नशीले इंजेक्शनों से गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल वह एक साल से जेल में है। वहीं महिला नशा तस्कर गंगेश भी उत्तरकाशी के नारकोटिक्स के एक अभियोग में 10 साल की सजायाफ्ता है। उसके भी पुलिस थानों में गहरे संबंध हैं और वहीं गैंग लीडर को पुलिस कार्रवाई की सूचना देती थी। इरफान पहले भी जेल जा चुका है। वह विभिन्न जगहों से स्मैक, चरस आदि एकत्रित कर राहिल को उपलब्ध कराता था। राहिल भी इससे पहले 2017 में एनडीपीएस एक्ट में गिरफ्तार हो चुका है।
होनी थी 15 किलो स्मैक की डील
तस्करों की बहुत जल्दी ही 15 किलो स्मैक की डील होने वाली थी। इसके लिए राहिल ने पथरी क्षेत्र में रहने वाले इरफान से बातचीत की थी। इसका पैसा गैंग लीडर सत्तार की ओर से दिया जाना था। डील होने पर गैंग की ओर से इसे अलग-अलग जगह पहुंचाया जाना था।
वर्दीधारी अपराधी की जगह होगी जेल : डीपीजी
हरिद्वार में पुलिस के संरक्षण में चल रहे नशा तस्करी के गैंग को डीजीपी अशोक कुमार ने गंभीरता से लिया है। कहा कि जिन्हें कार्रवाई के लिए रखा गया, उनका इस प्रकार के धंधे में लिप्त पाया जाना गंभीर मामला है। डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि वर्दीधारी अपराधियों को किसी भी हालात में बख्शा नहीं जाएगी। उनकी जगह जेल में होगी। दोनों पुलिसकर्मियों की पूरी रिकॉर्डिंग है। अगर कोई पुलिसकर्मी इस प्रकार के धंधों में लिप्त पाया जाता है तो उसे सीधे बर्खास्त कर जेल भेजा जाएगा।