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उत्तराखंड के जिस कॉलेज ने दिए नेपाल और मॉरीशस के पीएम, आज खतरे में उसका भविष्य

Fri, 11 Dec 2020 03:42 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal गौरव ममगाईं, अमर उजाला, देहरादून
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डीएवी पीजी कॉलेज - फोटो : amar ujala
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देहरादून में स्थित डीएवी पीजी कॉलेज शिक्षा का वह मंदिर है, जिसने न सिर्फ प्रदेश और देश का भविष्य सुनिश्चित किया है। बल्कि, दूसरे देशों को भी सर्वोच्च पदों पर योग्य व्यक्ति दिए हैं। यहां से शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र नेपाल और मॉरीशस देश के प्रधानमंत्री के पद पर काबिज हुए।

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देश व प्रदेश की बात करें तो यहां के होनहार छात्रों ने राजनीति ही नहीं, रक्षा, प्रशासनिक, बैंक, खेल और अन्य क्षेत्रों में भी मुकाम हासिल कर प्रदेश व देश का नाम रोशन किया है। देश एवं प्रदेश को भविष्य देने वाले होनहारों का यह ‘गढ़’ वर्तमान में खुद के सुरक्षित कल को लेकर आशंकित है।

यहां के शिक्षक अशासकीय कॉलेज का अनुदान खत्म करने का विरोध कर रहे हैं। उनका साफ कहना है कि जिस कॉलेज ने सरकारी अनुदान की मदद से प्रदेश व देश को योग्य व्यक्ति दिए, फिर उसके भविष्य के साथ खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है।
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शिक्षक व कर्मचारियों को डर है कि कॉलेज का अनुदान बंद करने से कॉलेज के अस्तित्व पर संकट मंडरा सकता है। उनकी मांग है कि अनुदान को जारी रखा जाए। बता दें कि अनुदान जारी रखने की मांग को लेकर डीएवी, डीबीएस और एमकेपी पीजी कॉलेज में शिक्षक-कर्मचारी रोजाना धरना दे रहे हैं। 

विरोध की वजह

- प्रदेश सरकार की ओर से राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 में संशोधन कर अनुदान का जिक्र नहीं किया गया है। जबकि, शिक्षकों का कहना है कि अनुदान की मदद से ही अशासकीय कॉलेजों के शिक्षक व कर्मचारियों के वेतन और अन्य व्यवस्थाएं होती हैं। अगर, अनुदान खत्म किया तो कॉलेज खत्म होने की कगार पर होंगे। इसका सीधा खामियाजा प्रदेश के लाखों छात्रों पर भी पड़ेगा। क्योंकि, उन्हें निजी कॉलेजों में महंगी फीस देकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर होना पड़ेगा। 

- डॉ. डीके त्यागी का कहना है कि सरकार अशासकीय कॉलेजों पर श्रीदेव सुमन विवि से संबद्ध होने के लिए लिखित में सिफारिश देने की मांग कर रही है। जबकि, कॉलेजों की इसमें कोई भूमिका नहीं है। सरकार किसी भी अशासकीय कॉलेज को पूर्व की भांति किसी भी विवि से संबद्ध करने के लिए स्वतंत्र है। सरकार कई बार कॉलेजों पर अन्य विवि से संबद्ध न होने का गलत आरोप लगा रही है। 

- शिक्षक संगठनों का यह भी कहना है कि सरकार नियुक्ति को लेकर कॉलेज पर हस्तक्षेप का आरोप लगा रही है। जबकि, कॉलेजों ने कभी इस पर आपत्ति नहीं जताई। कॉलेजों का आरोप है कि सरकार अनुदान खत्म करने के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे निराधार आरोप लगा रही है। हालांकि, एक शिक्षक वर्ग को नियुक्ति में सरकार के हस्तक्षेप और श्रीदेव सुमन विवि से संबंद्धता को लेकर भी आपत्ति है।  

कॉलेज की प्रमुख देन

- लोकेंद्र बहादुर चंद, पूर्व प्रधानमंत्री नेपाल
- शिवसागर रामगुलाम, मॉरीशस के पूर्व पीएम 
- ब्रह्म दत्त, पूर्व केंद्रीय मंत्री
- ब्रह्म सिंह वर्मा, पूर्व न्यायाधीश 
- कर्नल (रिटा.) अजय कोठियाल
- बछेंद्री पाल, माउंट एवरेस्ट फतेह करने वाली पहली भारतीय महिला
- नित्यानंद स्वामी, उत्तराखंड के पहले सीएम
- प्रेमचंद अग्रवाल, विधानसभा के वर्तमान अध्यक्ष
- हीरा सिंह बिष्ट, पूर्व कैबिनेट मंत्री
- शहीद मेजर विभूति धौण्डियाल (पिछले साल शहीद हुए)
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नियुक्तियां भी अटकीं, बढ़ा काम का बोझ

जानकारी के अनुसार कॉलेज में वर्तमान में 140 शिक्षक-कर्मचारी कार्यरत हैं। शिक्षकों पर लगातार काम का दबाव बढ़ा है। जबकि, करीब 55 प्रतिशत स्टाफ (नॉन टीचिंग) के पद खाली हैं। वहीं, 12 से 15 कर्मचारी ऐसे भी हैं जिन्हें कई महीने से वेतन नहीं मिल रहा है। 

डीएवी पीजी कॉलेज का गौरवान्वित करने वाला इतिहास रहा है। कॉलेज के छात्र देश ही नहीं विदेशों में भी सर्वोच्च पदों तक पहुंचे हैं। शिक्षकों ने छात्रों को तैयार करने में अपना सर्वस्व दिया है, लेकिन वर्तमान में जो परिस्थिति है उससे डीएवी पीजी कॉलेज के अस्तित्व पर खतरा महसूस किया जा रहा है। यही हाल डीबीएस, एसजीआरआर और एमकेपी पीजी कॉलेज का भी है। - डॉ. प्रशांत सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष, राष्ट्रीय शैक्षिक संघ

डीएवी पीजी कॉलेज और अन्य अशासकीय कॉलेजों का अनुदान खत्म किया जा सकता है। इससके विरोध में एक महीने से शिक्षक व कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं। अशासकीय कॉलेजों ने प्रदेश व देश को होनहार दिए हैं।  इसके बावजूद भी उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। ऐसा नहीं होना चाहिए। - डॉ. डीके त्यागी, महासचिव, एचएनबी केंद्रीय विवि-महाविद्यालय शिक्षक संघ

शासन स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। इस संबंध में ज्यादा कुछ कहना उचित नहीं होगा। जो भी निर्णय लिया जाएगा, सभी के हित में होगा।
- डॉ. कुमकुम रौतेला, निदेशक उच्च शिक्षा
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