केंद्र सरकार की महत्वपूूर्ण किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) योजना में संगठनों का गठन प्रदेश में सहकारिता अधिनियम के तहत करने का फैसला कर लिया गया है। एक सितंबर से इनके गठन की प्रकिया शुरू कर दी जाएगी।
किसान उत्पादक संगठनों का गठन दरअसल कंपनी एक्ट या फिर सहकारिता अधिनियम के तहत ही किया जाना है। प्रदेश में राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम या एनसीडीसी के तहत सौ एफपीओ बनाए जाने हैं। इसे देखते हुए ही प्रदेश में सहकारिता मंत्रालय ने सभी एफपीओ सहकारिता अधिनियम के तहत बनाने का फैसला किया है।
खास बात यह है कि सभी एफपीओ के गठन की प्रक्रिया एक सितंबर से शुरू भी कर दी जाएगी। अधिकारियों के मुताबकि एफपीओ की नियमावली भी अलग से बनाई जा रही है। इसी के साथ सहकारिता मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने भी एफपीओ के गठन में तेजी लाने को कहा है।
जिला स्तर पर समीक्षा बैठकें की जा रही हैं और उनकी ओर से अधिकारियों की टीम गठित कर एफपीओ बनाने को कहा जा रहा है। नोडल अधिकारी और अपर निबंधक आनंद शुक्ला के मुताबिक अगले तीन माह के अंदर सभी एफपीओ का बिजनेस प्लान, संपूर्ण मूल्य वर्धन व्यवस्था आदि बना ली जाएगी।
क्या होगा फायदा
सहकारिता की कोशिश एफपीओ के जरिये एक जिला, एक उत्पाद योजना को आगे बढ़ाने की है। पहाड़ में एक एफपीओ से 100 और मैदान में कम से कम 300 किसान जुड़ेंगे। इन किसानों को अपने उत्पाद की ब्रांडिंग, मार्केटिंग, मूल्य वर्धन आदि के लिए परेशान नहीं होना होगा।
केंद्र भी दे रही है फायदा
इस योजना की घोषणा पीएम नरेंद्र मोदी ने खुद की थी। इसमें नाबार्ड भी सहयोग कर रहा है। एफपीओ को केंद्र सरकार की तरफ से 2024 के बाद अगले पांच साल तक सहयोग भी मिलेगा। माना जा रहा है कि इतने समय में ये संगठन अपने पैरों पर खड़ा भी हो जाएगा।
एफपीओ के गठन में तेजी लाई जा रही है। यह तय कर लिया गया है कि जल्द से जल्द प्रदेश में एफपीओ गठित कर लिए जाएं। इसके लिए समितियों को टार्गेट भी दिया जा रहा है और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा रही है।
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डॉ.धन सिंह रावत, सहकारिता मंत्री