जिस दानदाता ने केदारनाथ में स्वर्णंजड़ित प्लेटें लगवाईं, उसी ने 2005 में तत्कालीन कांग्रेस शासनकाल में बदरीनाथ मंदिर में सोना दान किया था। तब कांग्रेस को कोई आपत्ति नहीं हुई। कांग्रेस केदारनाथ धाम की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है।
-सुरेश जोशी, प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा
केदारनाथ भगवान के गर्भ गृह में महाराष्ट्र के श्रद्धालु ने जो सोने का जो काम कराया है, उस पर संदेह करना व्यर्थ है। मंदिर समिति ने पूरी पारदर्शिता से काम किया है। उसे राजनीतिक रूप न दिया जाए। ये श्रद्धा का विषय है, राजनीति का नहीं। जो लोग शिगूफे छोड़ रहे हैं, मैं उनकी निंदा करता हूं। भक्तों की भावनाओं को आहत न करें। केदारनाथ हिंदू धर्म का उत्तर भारत का सबसे बड़ा ज्योतिर्लिंग है। इस तरह की जो लोग बातें करते हैं, उसका प्रत्यक्ष प्रमाण भगवान केदारनाथ ने अपना रौद्र रूप दिखाकर किया है।
- महंत रविंद्रपुरी, अध्यक्ष, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद
दानदाता की ओर से न तो 80-जी का सर्टिफिकेट मांगा गया और न ही अपने नाम की अपेक्षा की गई। मंदिर समिति ने किसी भी स्तर से आधिकारिक रूप से 230 किग्रा सोने की बात नहीं कही। पहले गर्भगृह में चांदी की प्लेटें लगी थींं। उनका वजन 230 किग्रा था। मीडिया में यह बात फैल गई कि 230 किग्रा सोना लगेगा। गर्भ गृह में एक हजार किलो तांबे की प्लेटें हैं इन पर 23 किलो सोने की परत चढ़ाई गई है।
- अजेंद्र अजय, अध्यक्ष बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति