पार्टी प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, जसपुर के विधायक आदेश चौहान, उत्तरकाशी के विधायक राजकुमार, उपनेता का दायित्य संभाल रहे विधायक करण माहरा को ही नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी देने पर अड़े हैं। जबकि विधायक ममता राकेश, विधायक फुरकान अहमद इस पक्ष में नहीं माने जा रहे हैं।
विधायक काजी निजामुद्दीन राष्ट्रीय सचिव होने के नाते किसी गुटबाजी में नहीं दिखना चाहते हैं। करन माहरा को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने पर पार्टी का जातीय संतुलन नहीं सध रहा है। ऐसे में प्रेदश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष दोनों ठाकुर हो जाएंगे। इसके बाद यदि चुनाव संचालन समिति की कमान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को सौंपी जाती है तो तीनों की प्रमुख पदों पर ठाकुर होने से पार्टी का जातीय गणित गड़बड़ा जाएगा।
ऐसे में पार्टी प्रदेश अध्यक्ष बदले जाने के फॉर्मूले पर भी विचार किया जा रहा है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष की इस दौड़ में गणेश गोदियाल, प्रदीप टम्टा, गोविंद सिंह कुंजवाल, ममता राकेश, काजी निजामुद्दीन आदि नेताओं के नाम सियासी चर्चाओं में तैर रहे हैं। पार्टी का एक गुट अध्यक्ष के दो कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की भी राय दे रहा है। जिसमें एक गढ़वाल और एक कुमाऊं से हो सकता है।
जानकारों का कहना है कि तेलंगाना में पार्टी ने जातीय समीकरण साधने के लिए यही फॉर्मूला अपनाया था।बहरहाल, इस मुद्दे पर पार्टी के वरिष्ठ नेता अपनी-अपनी खिचड़ी तो पका रहे हैं, लेकिन कोई खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं है। प्रदेश कांग्रेस का पूरा कुनबा दिल्ली में जुटा है। पार्टी नेता सोमवार तक इस मुद्दे का हल निकलने की बात कह रहे हैं, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह मुद्दा इतना आसान नहीं है, जितना बताया जा रहा है। इसलिए इसका हल निकलने में अभी कुछ दिन और लग सकते हैं। क्योंकि चुनावी वर्ष में पार्टी कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है।